उत्तर प्रदेश के आगामी उप-चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए आपको एप्लीकेशन देनी होगी. दरअसल इस वक्त प्रदेश की विधानसभा की 12 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव को लेकर सभी सियासी पार्टियां अपने-अपने तरीके से तैयारियां कर रही हैं. भाजपा ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चुनाव जीतने के लिए अपने कई मंत्रियों को रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है.
बहुजन समाज पार्टी ने भी अकेले दम पर चुनाव में उतरने का फैसला किया है. मायावती लगातार अपने कोऑर्डिनेटर्स के साथ बैठक कर रही हैं. बसपा सुप्रीमो ने भी अपने कई कद्दावर नेताओं को भी इस मिशन में लगाया है.
बसपा के साथ गठबंधन टूटने के बाद यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवार तय करने के लिए बकायदा एप्लीकेशन मांगी हैं. सपा ने अपने कार्यकर्ताओं, नेताओं और पदाधिकारियों के नाम एक संदेश जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि अगर किसी भी कार्यकर्ता को विधानसभा का उपचुनाव लड़ना है तो उन्हें आवेदन देना होगा.
विधानसभा का उपचुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्ति को अपना पूरा बायोडाटा और राजनीतिक जीवन में किए गए कामों का ब्यौरा देना होगा. पहले से तय फॉर्मेट के हिसाब से अपना फॉर्म भरकर कार्यकर्ताओं को लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में 20 जुलाई 2019 तक आवेदन करना होगा.
20 जुलाई तक आने वाले आवेदनों की स्कैनिंग होगी और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बात का फैसला लेंगे कि आखिर किस विधानसभा सीट से कौन प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा. हालांकि शर्त के बाद कुछ नेता असमंजस की स्थिति में हैं, लेकिन अखिलेश यादव के आदेश के कारण यह सबको मानना पड़ रहा है.
समाजवादी पार्टी ने टिकट के लिए आवेदन करने की शर्त के साथ ही यह बात भी स्पष्ट कर दी है कि अब उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लडे़गी. बसपा मुखिया मायावती के हालिया बयानों के बाद यह बात साफ हो गई है कि इस बार 2019 के विधानसभा उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी पूरी तरह से हिस्सा लेगी. यही नहीं, बसपा मुखिया मायावती ने जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर प्रदेश के सभी मंडलों के कोऑर्डिनेटर की बैठक करके यह बता दिया है कि उनकी तैयारी तेजी से चल रही है.
शिवेंद्र श्रीवास्तव