रामनाथ कोविंद के गांव में मुसलमानों ने सजाई मस्जिद, मनाया जश्न

रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने की खुशी में उनके गांव के मुसलमानों ने मस्जिद में सजावट की. उनकी जीत के बाद मस्जिद के भीतर जबर्दस्त जश्न मनाया गया. DJ लेकर लोग नाचते-गाते सड़कों पर उतरे.

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रामनाथ कोविंद के गांव में सजाई गई मस्जिद रामनाथ कोविंद के गांव में सजाई गई मस्जिद

कुमार अभिषेक

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 5:35 PM IST

रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने की खुशी में उनके गांव के मुसलमानों ने मस्जिद में सजावट की. उनकी जीत के बाद मस्जिद के भीतर जबर्दस्त जश्न मनाया गया. DJ लेकर लोग नाचते-गाते सड़कों पर उतरे.

रामनाथ कोविंद की पहचान भले ही RSS से रही हो, लेकिन कानपुर देहात के परौंख गांव में रहने वाले करीब ढाई हजार मुसलमानों के लिए रामनाथ कोविंद गांव के बेटे पहले हैं, किसी बाद में. गुरुवार शाम को जैसे ही रामनाथ कोविंद की जीत का ऐलान हुआ, परौंख गांव के सैकड़ों मुसलमान अपने मस्जिद की ओर भागे, जिसे सुबह से ही सजाया गया था. जीत की खुशी ऐसी थी कि मस्जिद में पहुंचे बच्चों ने गुब्बारे फोड़ने शुरू कर दिए और मस्जिद के भीतर एक उत्सव जैसा माहौल देखने लगा.

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आजतक की टीम जब परौंख गांव के मस्जिद में पहुंची तो वहां करीब दर्जनभर लोग पहले से बैठे थे और गोविंद के जीत की दुआ कर रहे थे. मस्जिद को गुब्बारों और चमकीले कागजों से सजाया गया था. मस्जिद के बाहर बड़ी-सी DJ लगी थी. जीत के बाद इस DJ पर बजने वाले गीत के साथ सैकड़ों मुसलमान झूमने और नाचने लगे और एक जुलूस की शक्ल में गोविंद के पैतृक घर तक पहुंचे.

एक बुजुर्ग मुसलमान की आंखों में आंसू थे. जीत के साथ ही उन्होंने आजतक को बताया कि हमें राजनीति से तो कोई मतलब नहीं, लेकिन हमने इतना देखा है कि रामनाथ गोविंद के पास अपना एक बिस्वा जमीन भी अब इस गांव में नहीं है और अपना मकान जहां, उनके पिता परचून की दुकान चलाते थे, उसे उन्होंने गांव के कम्युनिटी हॉल के लिए दान कर दिया है, जो हम सभी गांव वालों के लिए मिलन स्थल बन गया है.

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गांव के मुसलमान जब रामनाथ कोविंद की तस्वीर लेकर थिरकते जुलूस की शक्ल में निकले तो पूरे गांव ने जबरदस्त स्वागत किया. मुस्लिम महिलाएं और लड़कियां अपने झरोखों से कोविंद के लिए निकले इस जुलूस को निहारती नजर आईं, तो मंदिर के पास खड़े लोगों ने मंदिर से निकले प्रसाद को इनके बीच बांटा.

इस गांव मे सांप्रदायिक सौहार्द कभी टूटा नहीं, लेकिन कोविंद के राष्ट्रपति बनने की खुशी ने तो नामों के भी भेद मिटा दिए.

 

 

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