रायबरेली सदर में जीती कांग्रेस, लेकिन सोनिया नहीं अदिति सिंह की बदौलत

रायबरेली में कांग्रेस की न तो पार्टी की जीत है और न ही इसमें सांसद सोनिया गांधी का योगदान रहा. इस जीत के वजह अदिति सिंह की मेहनत और अखिलेश सिंह के रुतबा रहा. इलाके के लोगों के कहना है कि अदिति ने घर-घर जाकर कांग्रेस प्रत्याशी के लिए वोट मांगे और चुनाव उनके ही नाम पर लड़ा गया था.

फोटो साभार- आशीष त्रिवेदी फेसबुक
अनुग्रह मिश्र
  • रायबरेली,
  • 01 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 5:14 PM IST

उत्तर प्रदेश में रायबरेली और अमेठी को कांग्रेस पार्टी का गढ़ कहा जाता है. अमेटी में निकाय चुनाव हारी कांग्रेस के लिए रायबरेली के नतीजे थोड़े सुकून भरे जरूर रहे. यहां से कांग्रेस की पूर्णिमा श्रीवास्तव ने जीत दर्ज कर जिले की पहली महिला चेयरमैन बनने का इतिहास रच दिया. 27 साल में यह पहला मौका है जब कोई महिला पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुई है.

जानकारी के मुताबिक रायबरेली में कांग्रेस में बगावत हो गई थी और पूर्णिमा में जीतना बहुत मुश्किल था. इलाके के कई कांग्रेसी पार्टी का हाथ छोड़ विरोधी खेमे की ओर मुढ़ गए थे. लेकिन ऐसे वक्त में रायबरेली के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह और उनकी विधायक बेटी अदिति सिंह ने पूर्णिमा श्रीवास्तव को जीत दिलाने की जिम्मेदारी संभाली.

रायबरेली में कांग्रेस की न तो पार्टी की जीत है और न ही इसमें सांसद सोनिया गांधी का योगदान रहा. इस जीत के वजह अदिति सिंह की मेहनत और अखिलेश सिंह के रुतबा रहा. इलाके के लोगों के कहना है कि अदिति ने घर-घर जाकर कांग्रेस प्रत्याशी के लिए वोट मांगे और चुनाव उनके ही नाम पर लड़ा गया था. बता दें कि विदेश से मैनेजमेंट की पढ़ाई कर लौटी अदिति ने बीजेपी की लहर के बीच रायबरेली सदर सीट से कांग्रेस की साख को बचाए रखा.

रायबरेली में अद्भुत संयोग

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी साल 2004 से लगातार रायबरेली से सांसद हैं और खास बात यह है कि पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लहर के बीच भी सोनिया रायबरेली से सांसद चुनकर आईं हैं. इस बार के विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस की अदिति सिंह को जीत मिली है. अब जिले की तीसरी बड़ी सीट मानी जाने वाली नगर पालिका अध्यक्ष पद पर भी पूर्णिमा श्रीवास्तव के रूप में महिला ही काबिज हो गईं हैं.

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