उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध की सिफारिश की है. नागरिकता संशोधन कानून पर प्रदेश भर में हिंसा में शामिल होने के सबूतों के बाद डीजीपी मुख्यालय ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश गृह विभाग को भेजा है.
गृह विभाग अब इस सिफारिश को आगे केंद्र के पास भेजेगा. डीजीपी मुख्यालय ने अपनी सिफारिश में पीएफआई के बारे में लिखा है कि इसमें इस्लामिक स्टूडेंट मूवमेंट ऑफ इंडिया यानि सिमी के ज्यादातर सदस्य जुड़ गए हैं. इन संगठनों के लोगों के पास से पूरे राज्य में आपत्तिजनक साहित्य और सामग्री बरामद की गई है.
यूपी की हिंसा में पकड़े गए कई लोगों के संबंध पीएफआई से निकले हैं जबकि पीएफआई के कई सदस्य पकड़े गए जिन पर हिंसा फैलाने का आरोप है.
इससे पहले उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर पूरे राज्य के कई जिलों में हुए तमाम हिंसक प्रदर्शनों के खिलाफ योगी सरकार सख्ती से काम लेने की खबर आई थी. तब खबर आई थी कि है.
लखनऊ हिंसा में 3 गिरफ्तारी
सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश गृह विभाग पीएफआई को प्रतिबंधित करने की तैयारियों में जुट गया है. लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा मामले में पुलिस ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया था.
गिरफ्तार लोगों की पहचान पीएफआई अध्यक्ष वसीम अहमद, कोषाध्यक्ष नदीम, मंडल अध्यक्ष अशफाक के रूप में हुई थी. साथ ही पुलिस ने इस बात का दावा भी किया था कि लखनऊ में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गुरुवार (19 दिसंबर) को हिंसा का मास्टरमाइंड यही संगठन है.
कई राज्यों में सक्रिय PFI
पीएफआई के कार्यकर्ता कई राज्यों में लगातार सक्रिय रहे हैं. दिल्ली, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, केरल, झारंखड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में यह संगठन सक्रिय है.
पिछले दिनों सीएए पर शामिल थे. मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) की रिपोर्ट के मुताबिक PFI से जुड़े लोगों ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बैठक की थी.
कुमार अभिषेक