है दवा कारोबारी, बताते थे इंटीलिजेंस अफसर... ASP के सस्पेंड होने की इनसाइड स्टोरी

बलिया के अपर पुलिस अधीक्षक विजय कुमार त्रिपाठी के निलंबन की इनसाइड स्टोरी अब सामने आ गई है. बताया जा रहा है कि विजय कुमार त्रिपाठी को विकास कुमार सिंह नाम के एक शख्स की वजह से निलंबित किया गया है, जिसे वह इंटीलिजेंस अफसर बताते थे.

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उत्तर प्रदेश पुलिस (सांकेतिक तस्वीर) उत्तर प्रदेश पुलिस (सांकेतिक तस्वीर)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 26 मई 2022,
  • अपडेटेड 10:31 AM IST
  • बलिया के ASP विजय त्रिपाठी सस्पेंड
  • निलंबन के पीछे की कहानी में विकास सिंह का नाम


उत्तर प्रदेश सरकार ने बलिया के अपर पुलिस अधीक्षक विजय कुमार त्रिपाठी को सस्पेंड किया गया. विजय कुमार त्रिपाठी के निलंबन की इनसाइड स्टोरी अब सामने आ गई है. बताया जा रहा है कि विजय कुमार त्रिपाठी को विकास कुमार सिंह नाम के एक शख्स की वजह से निलंबित किया गया है, जिसे वह इंटीलिजेंस अफसर बताते थे.

अपर पुलिस अधीक्षक विजय कुमार त्रिपाठी, बलिया जिले के चकिया के रहने वाले विकास कुमार सिंह को इंटीलिजेंस का बड़ा अधिकारी बताकर लोगों से मुलाकात करवा रहे थे. बताया जा रहा है कि विकास कुमार सिंह वाराणसी में दवा व्यवसाई है और वहां मेडिकल स्टोर चलाता है. अक्सर अपनी जमीन जायदाद की देखरेख के लिए वह बलिया आता है.

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जिले में एडिशनल एसपी विजय त्रिपाठी के दफ्तर से लेकर उसके घर तक विकास कुमार सिंह का बेरोकटोक आना-जाना रहा है. जिले के कई थानेदार व चौकी इंचार्ज ने विकास सिंह को एडिशनल एसपी के घर पर देखा है. विजय त्रिपाठी के साथ अपनी तस्वीरें दिखाकर विकास सिंह जिले में कई लोगों से काम करवाने के नाम पर पैसे लेता रहा.

इसकी कई बार शिकायत भी हुई. विजय त्रिपाठी ने भी जिले के संभ्रांत लोगों से लेकर विधानसभा चुनाव में आए ऑब्जर्वर तक को विकास कुमार सिंह का परिचय इंटीलिजेंस के अफसर के तौर पर दिया. शासन ने इस संबंध में गोपनीय जांच करवाई. जांच में आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके बाद विजय त्रिपाठी को सस्पेंड कर दिया गया है.

गृह विभाग की जांच में पाया गया कि विकास कुमार सिंह से एएसपी विजय त्रिपाठी का दोस्ताना है. जांच में पाया गया कि विकास सिंह खुद को कभी रॉ का एजेंट तो कभी सचिवालय का अधिकारी बताता था. यही नहीं इसी के प्रभाव से बलिया के कई थानों में अपने काम करवाए हैं. थानेदारों से दोस्त के काम करने को लेकर भी निर्देश दिए जाते थे.

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गृह विभाग ने विजय त्रिपाठी को अपनी जांच में दोषी मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम 4 के अंतर्गत दोषी मानते हुए निलंबित करते हुए नियमावली के नियम 7 के अंतर्गत विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

 

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