कौन हैं IPS बी. सुमति? आधी रात को भेष बदलकर बस स्टॉप पहुंचीं, 3 घंटे तक चला सीक्रेट ऑपरेशन

रात के साढ़े 12 बजे... सुनसान बस स्टॉप... सड़क पर अकेली खड़ी एक महिला... और अंधेरे में उस पर टिकती दर्जनों नजरें. कुछ लोग करीब आए, कुछ ने बात करने की कोशिश की, तो कुछ की नीयत ने पुलिस को अलर्ट कर दिया. लेकिन उन्हें नहीं पता था कि साधारण कपड़ों में खड़ी यह महिला कोई आम यात्री नहीं, बल्कि शहर की नई पुलिस कमिश्नर IPS बी. सुमति थीं, जो महिलाओं की सुरक्षा का सच जानने के लिए आधी रात को अंडरकवर मिशन पर निकली थीं.

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मलकाजगिरी की नई पुलिस कमिश्नर बनीं हैं बी. सुमति. (Photo: ITG) मलकाजगिरी की नई पुलिस कमिश्नर बनीं हैं बी. सुमति. (Photo: ITG)

अब्दुल बशीर

  • हैदराबाद,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:31 AM IST

हैदराबाद की सड़कों पर आधी रात के बाद सन्नाटा था. रात के साढ़े 12 बज रहे थे. दिलसुखनगर का बस स्टॉप लगभग सुनसान था और सड़क पर दूर-दूर तक गाड़ियों की हल्की आवाजें सुनाई दे रही थीं. बस स्टॉप की पीली रोशनी के नीचे एक महिला अकेली खड़ी थी. साधारण सलवार-सूट, हाथ में मोबाइल और चेहरे पर बिल्कुल सामान्य भाव. देखने वालों को लग रहा था कि शायद कोई महिला देर रात बस का इंतजार कर रही है.

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लेकिन उस रात हैदराबाद की सड़कों पर जो हो रहा था, वह किसी फिल्मी सस्पेंस से कम नहीं था. उस अकेली महिला के आसपास कई लोग थे. कुछ दूर खड़े लोग लगातार देख रहे थे. कोई धीरे-धीरे नजदीक बढ़ रहा था, तो कोई बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रहा था.

और तभी... अंधेरे में छिपी टीम अचानक एक्टिव हो जाती है. कुछ लोगों को वहीं रोक लिया जाता है. कुछ को अलग ले जाकर पूछताछ शुरू हो जाती है. क्योंकि वह महिला कोई आम यात्री नहीं थी. वह थीं मलकाजगिरी की नई पुलिस कमिश्नर- IPS बी. सुमति.

1 मई को बी. सुमति ने मलकाजगिरी पुलिस कमिश्नर का पद संभाला था. इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि महिलाओं की सुरक्षा का सच एयर-कंडीशंड ऑफिस में बैठकर नहीं समझा जा सकता. इसके लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा... वही सड़क, जहां हर रात हजारों महिलाएं सफर करती हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने उसी रात एक सीक्रेट अंडरकवर ऑपरेशन प्लान किया.

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यह भी पढ़ें: जब भेष बदलकर निकलीं IPS, लूट की सूचना देकर लेती रहीं पुलिसकर्मियों का टेस्ट

रात करीब 12:30 बजे बी. सुमति भेष बदलकर दिलसुखनगर बस स्टॉप पहुंचीं. आसपास सादे कपड़ों में पुलिस टीमें तैनात थीं. वहां मौजूद लोगों में से किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस महिला को वे देख रहे हैं, वह शहर की पुलिस कमिश्नर हैं.

सुमति बस स्टॉप पर अकेली खड़ी रहीं. कुछ मिनट बीते... फिर लोगों की नजरें उन पर टिकने लगीं. एक युवक पास आकर बात करने की कोशिश करता है. दूसरा कुछ देर तक घूरता रहता है. कुछ लोग आसपास मंडराने लगते हैं. अगले तीन घंटे में करीब 40 लोग उनके पास पहुंचे.

कई युवक नशे में बताए गए. कुछ पर गांजा लेने का शक था. कुछ का व्यवहार महिलाओं के प्रति असामान्य और संदिग्ध नजर आया. जैसे ही किसी ने मर्यादा लांघने की कोशिश की, आसपास मौजूद सादे कपड़ों वाली पुलिस टीम तुरंत हरकत में आ गई. कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया. कई लोगों की मौके पर काउंसलिंग की गई.

इस ऑपरेशन का मकसद यह समझना था कि देर रात अकेली महिला किस तरह की परिस्थितियों का सामना करती है. बी. सुमति ने खुद महसूस किया कि रात के समय महिलाओं को सिर्फ अपराध का ही नहीं, बल्कि लगातार घूरती नजरों, पीछा करने और अनचाही बातचीत का भी सामना करना पड़ता है. कई बार माहौल ही ऐसा बना दिया जाता है कि महिला खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे. 

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कौन हैं आईपीएस बी. सुमति?

बी. सुमति तेलंगाना पुलिस की तेज-तर्रार अधिकारियों में गिनी जाती हैं. मलकाजगिरी पुलिस कमिश्नर बनने से पहले वह स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच यानी SIB की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं. उनके करियर की सबसे चर्चित उपलब्धियों में माओवादी गतिविधियों से जुड़े कई संवेदनशील मामलों को संभालना शामिल रहा है.

उन्होंने लंबे समय तक चले उस अभियान में भी अहम भूमिका निभाई, जिसमें कई माओवादियों ने मुख्यधारा में वापसी की. सख्त प्रशासनिक शैली और जमीनी काम करने की छवि रखने वाली आईपीएस बी. सुमति का यह नया अंदाज चर्चा का विषय बन गया है.

जैसे ही इस सीक्रेट ऑपरेशन की जानकारी सामने आई, सोशल मीडिया पर खूब चर्चा होने लगी. कई लोगों ने इसे महिला सुरक्षा को लेकर 'रियलिटी चेक' बताया, तो कुछ ने कहा कि अगर अधिकारी खुद मैदान में उतरें, तभी सिस्टम की असली तस्वीर सामने आती है. लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर एक वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी को भी देर रात इस तरह के अनुभवों का सामना करना पड़ सकता है, तो आम महिलाओं की स्थिति कैसी होगी. 

दिलसुखनगर की उस रात ने यह भी दिखा दिया कि महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ CCTV, पेट्रोलिंग और दावों से तय नहीं होती. सुरक्षा उस एहसास का नाम है, जब कोई महिला रात के सन्नाटे में भी बिना डरे बस स्टॉप पर खड़ी रह सके.

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