तेलंगाना में 800 साल पुराने शिव मंदिर पर चला सरकारी बुलडोजर, फूटा लोगों का गुस्सा, जानें अब क्या होगा?

Telangana Shiva Temple Demolished: तेलंगाना के वारंगल में काकतीय युग का 800 साल पुराना शिव मंदिर स्कूल प्रोजेक्ट के लिए गिराया गया. गांव वालों और विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई है. अब प्रशासन बैकफुट पर आ गया है...

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मिट्टी के किले में था 13वीं सदी का शिव मंदिर.(Photo:Screengrab) मिट्टी के किले में था 13वीं सदी का शिव मंदिर.(Photo:Screengrab)

अब्दुल बशीर

  • वारंगल ,
  • 08 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:35 PM IST

तेलंगाना के वारंगल जिले में एक प्राचीन शिव मंदिर को गिराए जाने से लोगों में भारी गुस्सा भड़क उठा है. माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 800 साल पुराना है और काकतीय युग का है. खानपुर मंडल के अशोक नगर गांव में एक ऐतिहासिक मिट्टी के किले के अंदर स्थित इस मंदिर को एक इंटीग्रेटेड स्कूल प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए जमीन समतल करने के काम के दौरान गिरा दिया गया.

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स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर एक मिट्टी के किले के अंदर स्थित था, जिसके बारे में माना जाता है कि इसे काकतीय शासक गणपति देव के शासनकाल के दौरान बनवाया गया था. गांववालों ने बताया कि उन्होंने सरकार से कई बार अपील की थी कि इस जर्जर हो चुकी इमारत की मरम्मत कराई जाए और मंदिर में पारंपरिक पूजा-पाठ फिर से शुरू किया जाए. हालांकि, पिछले कई सालों में मरम्मत का कोई काम नहीं किया गया.

खजाने की तलाश का एंगल?

निवासियों ने यह भी दावा किया कि कुछ अज्ञात लोगों ने पहले भी इस सुनसान पड़े मंदिर स्थल को निशाना बनाया था, ताकि वहां छिपा हुआ खजाना मिल सके.  उन्होंने कई बार इसके लिए विस्फोटकों का भी इस्तेमाल किया था.

यह विवाद तब और बढ़ गया, जब राज्य सरकार ने अपनी प्रमुख शिक्षा पहल के तहत एक इंटीग्रेटेड स्कूल बनाने के लिए इस इलाके में 30 एकड़ से ज्यादा जमीन की पहचान की. जमीन साफ ​​करने के काम के दौरान, इस प्राचीन शिव मंदिर को गिरा दिया गया, जिसकी गांव वालों और अलग-अलग पार्टियों के राजनीतिक नेताओं ने कड़ी आलोचना की.

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स्थानीय लोगों ने यह सवाल उठाया कि पुरातत्व विभाग के दखल के बिना इतनी ऐतिहासिक महत्व वाली इमारत को कैसे नष्ट किया जा सकता है.

राजनीतिक नेताओं और गांववालों ने मांग की कि मंदिर को उसी जगह पर तुरंत दोबारा बनवाया जाए और चेतावनी दी कि अगर इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे. देखें VIDEO:- 

विधायक का तर्क और कलेक्टर का आश्वासन

लोगों के गुस्से को देखते हुए वारंगल की जिला कलेक्टर सत्य शारदा और नरसंपेट के विधायक डोंथी माधव रेड्डी ने हालात का जायजा लेने के लिए उस जगह का दौरा किया.

पत्रकारों से बात करते हुए विधायक माधव रेड्डी ने बताया कि इंटीग्रेटेड स्कूल प्रोजेक्ट के लिए इस जमीन को इसलिए चुना गया था, क्योंकि यहां काफी खुली जगह और घनी हरियाली थी; लेकिन सर्वे के दौरान अधिकारी इस प्राचीन मंदिर को देख नहीं पाए.

उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्कूल प्रोजेक्ट के साथ-साथ उसी जगह पर शिव मंदिर को भी दोबारा बनवाया जाएगा. विधायक ने यह भी कहा कि दोबारा बनाए गए मंदिर में देवी सरस्वती की मूर्ति भी स्थापित की जाएगी.

जिला कलेक्टर सत्य शारदा ने प्राचीन स्मारकों को दुर्लभ विरासत संपत्तियां बताया और आने वाली पीढ़ियों के लिए उन्हें संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि प्रशासन पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से सलाह-मशविरा करेगा, मंदिर के मूल डिजाइन की जांच करेगा और उसी के अनुसार मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए कदम उठाएगा.

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राजनीतिक उबाल और गुस्सा

इस बीच, BJP के जिला महासचिव राणा प्रताप रेड्डी ने मंदिर को गिराए जाने की कड़ी निंदा की और मांग की कि मंदिर का पुनर्निर्माण उसकी मूल स्थापत्य शैली में ही किया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस ढांचे को पुरातत्व विभाग की मंजूरी के बिना ही गिरा दिया गया. 

BRS के पूर्व विधायक पेड्डी सुदर्शन रेड्डी ने भी सरकार की आलोचना करते हुए अधिकारियों पर विकास के नाम पर तेलंगाना की ऐतिहासिक विरासत की उपेक्षा करने का आरोप लगाया. उन्होंने मंदिर को गिराने के लिए जिम्मेदार ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की और यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या इस ढांचे को गिराने के लिए कोई आधिकारिक अनुमति दी गई थी.

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