के.कविता की नई पार्टी TRS का ऐलान, कुछ महीने पहले BRS से हुई थीं सस्पेंड

के.कविता ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'तेलंगाना राष्ट्र समिति' की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि 12 साल बाद भी तेलंगाना की जनता को पानी, धन और रोजगार जैसी मूलभूत जरूरतें नहीं मिली हैं. कविता ने BRS से निलंबन के बाद ये कदम उठाया है.

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के.कविता ने अपनी पार्टी का लक्ष्य भी बताया है. (Visual: @OfficeOfKavitha/X) के.कविता ने अपनी पार्टी का लक्ष्य भी बताया है. (Visual: @OfficeOfKavitha/X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:58 AM IST

तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी और पूर्व सांसद के. कविता ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है. उनकी इस पार्टी का नाम 'तेलंगाना राष्ट्र समिति' (TRS) रखा गया है. खास बात ये है कि इसी नाम से उनके पिता ने कभी तेलंगाना आंदोलन की शुरुआत की थी.

के. कविता को कुछ महीनों पहले उनके पिता की पार्टी 'भारत राष्ट्र समिति' (BRS) से निकाल दिया गया था.  उनपर पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए BRS से निलंबित कर दिया गया था. ऐसे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कविता ने अपनी नई पार्टी बनाने के संकेत दे दिए थे.

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नई पार्टी के गठन को लेकर बात करते हुए कविता ने दावा किया कि तेलंगाना को राज्य बने 12 साल से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन जनता की उम्मीदें अभी भी अधूरी हैं. उन्होंने कहा, '12 साल बाद भी हम नीलू, निधि, नियमाकलु (पानी, पैसा और रोजगार) हासिल नहीं कर पाए हैं, जो तेलंगाना आंदोलन का आधार थे.'

कविता ने आरोप लगाया कि राज्य की पिछली सरकारों ने किसानों, युवाओं, बिजनेसमैन और पिछड़े समुदायों की उम्मीदों को तोड़ा है. उनकी नई पार्टी का मकसद सबका विकास और आत्मनिर्भरता होगा.

'जनता के करीब होगा शासन'

के. कविता ने बताया कि उनकी पार्टी का सिद्धांत शासन को जनता के करीब ले जाना है. वो उन स्थानीय समस्याओं को तरजीह देंगी जिन्हें अक्सर बड़े राजनीतिक दल नजरअंदाज कर देते हैं. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी जाति, धर्म या समुदाय के भेदभाव के बिना सभी की सेवा करेगी.

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BRS और BJP पर हमला

कविता ने आरोप लगाया कि BRS और BJP दोनों ही तेलंगाना में विपक्ष की भूमिका निभाने में नाकाम रहे हैं. उन्होंने पीटीआई से बात करते हुए कहा, 'BRS पार्टी 1,000 साल बाद भी नहीं बदलेगी. वहां उन लोगों का कोई जिक्र नहीं है जिन्होंने तेलंगाना को राज्य बनाने के लिए लड़ाई लड़ी थी.'

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