हैदराबाद: डिजिटल मार्केटिंग फ्रॉड का पर्दाफाश, लालच देकर लोगों से हो रही थी ठगी

हैदराबाद में डिजिटल मार्केटिंग स्कीम के नाम पर चल रहे एक बड़े मल्टी-नेटवर्क धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस ने आसान कमाई का लालच देकर लाखों रुपए ठगने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया है. जांच में पता चला कि यह एक पिरामिड स्कीम थी जिसमें कई सदस्यों को जोड़कर कमीशन दिया जाता था.

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पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. (Photo: Representational) पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. (Photo: Representational)

अब्दुल बशीर

  • हैदराबाद,
  • 29 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:32 AM IST

हैदराबाद की रेन बाजार पुलिस ने डिजिटल मार्केटिंग स्कीम के बहाने चल रहे एक मल्टी-नेटवर्क धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने आसान कमाई का लालच देकर निर्दोष लोगों को ठगने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया है.

पकड़े गए आरोपियों की पहचान एडी बाजार निवासी मोहम्मद अकरम उर्फ अकरम (22) और करीमनगर निवासी मोहम्मद नौमान रजा (22) के रूप में हुई है. दोनों डिजिटल मार्केटिंग गतिविधियों में शामिल थे. पुलिस ने उन्हें 24 मार्च को चारमीनार के मीरचौक इलाके में एतेबार चौक से पकड़ा है.

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पुलिस के मुताबिक, इन दोनों ने मुख्य रूप से 18 से 25 साल की उम्र के युवाओं को 'फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट्स'की बिक्री से जुड़े एक बिजनेस मॉडल में शामिल होने का लालच दिया. उन्होंने रेफरल-बेस्ड सिस्टम के जरिए तुरंत और आसान कमाई का वादा किया था.

जांच में पता चला कि आरोपियों ने शुरू में आईडी बनाने के लिए पीड़ितों से 200 रुपए का मामूली जॉइनिंग शुल्क वसूला. इसके बाद, उन्होंने पीड़ितों को प्रोडक्ट खरीदने में लगभग 30,000 रुपए निवेश करने के लिए राजी किया. आरोपियों ने उन्हें यकीन दिलाया कि उन्हें भारी कमीशन मिलेगा.

'अचीवर्स क्लब' और सोशल मीडिया का इस्तेमाल

पुलिस ने खुलासा किया कि अकरम पीड़ितों को आकर्षित करने के लिए "akram_dreams" नाम से एक इंस्टाग्राम अकाउंट चलाता था. यहां वो प्रमोशन से जुड़ी रील्स डालता था. उसने करमनघाट में एक कमर्शियल स्पेस किराए पर लिया था और इस काम को चलाने के लिए 'अचीवर्स क्लब' नाम से एक ऑफिस भी बनाया था.

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आरोपियों ने कथित तौर पर लगभग 40 सदस्यों का एक नेटवर्क बनाया था, जिन्हें आगे अन्य लोगों को जोड़ने का काम सौंपा गया था. डायरेक्ट सेल पर 40-50% कमीशन दिया जाता था, जबकि भर्ती के अलग-अलग स्तरों पर छोटा प्रतिशत मिलता था, जो एक पिरामिड स्ट्रक्चर की ओर इशारा करता है. कई मामलों में पीड़ितों को न तो वादे के मुताबिक प्रोडक्ट मिले और न ही उनके पैसे वापस मिले.

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एक मर्सिडीज-बेंज कार, कई मोबाइल फोन, एक आईपैड, एक मैकबुक, फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट का स्टॉक, क्लाइंट डेटा वाले दस्तावेज और इस स्कीम से जुड़ी दूसरी चीजें जब्त की है.

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भारतीय न्याय संहिता (BNS), तेलंगाना डिपॉजिटर्स ऑफ फाइनेंशियल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट और प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

पुलिस ने जनता को अनरियल रिटर्न का वादा करने वाली स्कीम्स का शिकार न होने की चेतावनी दी है. उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वो निवेश करने से पहले ऐसे बिजनेस मॉडल की वैधता की जांच जरूर करें.

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