डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसे 81 साल के बुजुर्ग, जालसाजों ने ऐसे ठगे 15 करोड़ रुपये

क्या आप सोच सकते हैं कि घर बैठे-बैठे कोई आपको डिजिटल अरेस्ट कर ले और आपकी जिंदगी भर की कमाई मिनटों में साफ कर दे? कर्नाटक के बेलगावी में एक 81 साल के बुजुर्ग बिजनेसमैन के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. जालसाजों ने सीबीआई (CBI) अधिकारी बनकर उन्हें डराया और एक-दो लाख नहीं, बल्कि पूरे 15 करोड़ रुपये ठग लिए. ठगी का यह तरीका इतना शातिर था कि पीड़ित को भनक तक नहीं लगी.

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मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर 15 करोड़ की ठगी (प्रतीकात्मक तस्वीर) मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर 15 करोड़ की ठगी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:42 PM IST

क्या आप सोच सकते हैं कि घर बैठे-बैठे कोई आपको डिजिटल अरेस्ट कर ले और आपकी जिंदगी भर की कमाई मिनटों में साफ कर दे? कर्नाटक के बेलगावी में एक 81 साल के बुजुर्ग बिजनेसमैन के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है. जालसाजों ने सीबीआई (CBI) अधिकारी बनकर उन्हें डराया और एक-दो लाख नहीं, बल्कि पूरे 15 करोड़ रुपये ठग लिए. ठगी का यह तरीका इतना शातिर था कि पीड़ित को भनक तक नहीं लगी.

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न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस बुजुर्ग बिजनेसमैन को पिछले करीब 6 हफ्तों से लगातार धमकियां मिल रही थीं. ठगों ने उन्हें वीडियो कॉल किया और खुद को सीबीआई का बड़ा अधिकारी बताया. जालसाजों ने बिजनेसमैन पर आरोप लगाया कि उन्होंने 25 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की है और इसके बदले 5 लाख रुपये का कमीशन लिया है.

जालसाजों ने उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया और कहा कि अगर वो बचना चाहते हैं, तो उन्हें अपने सारे बैंक अकाउंट की जानकारी देनी होगी. इतना ही नहीं, बुजुर्ग को भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने तक उनका पैसा एक 'सेफ सरकारी अकाउंट' में रहेगा और बाद में वापस कर दिया जाएगा. डर के मारे बुजुर्ग ने टुकड़ों-टुकड़ों में कुल 15 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए.

जब तक खुला राज, तब तक हो चुकी थी देर

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हफ्तों तक पैसे भेजने के बाद जब उधर से कोई जवाब आना बंद हो गया और सारे नंबर बंद मिले, तब बुजुर्ग को ठगी का अहसास हुआ. उन्होंने पिछले हफ्ते पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. सायबर (CEN) पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो पता चला कि पैसा जिस अकाउंट में गया था, वहां अब सिर्फ 90 लाख रुपये ही बचे हैं. बाकी की रकम ठगों ने पार कर दी.

बेलगावी पुलिस कमिश्नर ने अब इस मामले के लिए एक स्पेशल टीम बनाई है. लेकिन यह घटना हम सबके लिए एक बड़ा सबक है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर इस तरह से अरेस्ट नहीं करती और न ही पैसे मांगती है.

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