जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के प्रावधानों को हटाए जाने के मसले पर संसद में खुलकर विरोध दर्ज करा चुके जनता दल यूनाइटेड(जदयू) के सुर अब नरम पड़ गए हैं. बीजेपी के इस सहयोगी दल ने अब कहा है कि जब संसद में विरोध के बावजूद धारा 370 के अहम प्रावधान हट गए तो अब इसे स्वीकार किया जाना चाहिए. वहीं सदन में धारा 370 के मसले पर सरकार के विरोध के अपने निर्णय का बचाव करते हुए जेडीयू के संगठन महासचिव आरसीपी सिंह ने कहा कि स्वर्गीय जॉर्ज फर्नांडिस की आत्मा को ठेस न पहुंचे, इसलिए जेडीयू ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का संसद में विरोध किया था.
क्यों बैकफुट पर आई जदयू
सूत्र बता रहे हैं कि धारा 370 पर सरकार के फैसले को जिस तरह से देश में जनता का व्यापक समर्थन मिला. यहां तक कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के कई नेताओं ने भी पार्टी लाइन से परे हटकर इसका समर्थन किया. उससे जनता दल यूनाइटेड को लगा कि अगर अब भी वह विरोध का स्टैंड लेती है तो फिर यह जनमत के खिलाफ जाने वाली बात होगी. जिसका आगे चलकर नुकसान उठाना पड़ सकता है. वहीं गठबंधन में भी दरार पड़ सकती है. सूत्रों का कहना है कि धारा 370 पर बागी रुख अपनाने के पीछे जदयू की मजबूरी थी. दरअसल, बिहार में नीतीश कुमार की सेक्युलर छवि के कारण बीजेपी से नजदीकियों के बावजूद जदयू को मुस्लिमों का भी कुछ वोट मिलता है.चूंकि कश्मीर मुस्लिम डोमिनेटेड एरिया है. ऐसे में जदयू को लगा कि स्थानीय मुस्लिमों की भावनाओं भी कश्मीरी मुस्लिमों के साथ जुड़ीं हो सकती हैं. इस नाते इसका समर्थन करते हुए नहीं दिखना चाहिए. कुछ ऐसा ही रुख तीन तलाक पर भी जदयू ने अपनाया था.
सूत्रों के मुताबिक इस वजह से कश्मीर के मसले पर जदयू का बीजेपी से विपरीत रुख रहा. यह भी कहा जा रहा कि पहले विरोध और बाद में रुख नरम करने के पीछे जदयू ने दोनों धड़ों को साधने की रणनीति अपनाई. कहा जा रहा है कि इससे जदयू ने अपने अल्पसंख्यक वोटर्स को भी संदेश दिया कि वह धारा 370 के खिलाफ है, वहीं दूसरी तरफ बाद में रुख नरम कर यह भी जता दिया कि वह देश के मूड का विरोध भी नहीं करना चाहती.
जदयू के राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह ने अब सरकार से जम्मू-कश्मीर में मौजूद सभी समस्याओं के समाधान के साथ रोजगार, विकास आदि की दिशा में बेहतरी से काम करने की मांग की है.
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