फ्रांस की मदद से रेलवे को बेहतर बनाएगी मोदी सरकार, रेल मंत्री ने की लंबी बैठक

रेलभवन में शुक्रवार को तकरीबन एक घंटे चली इस बैठक में देश में रेलवे स्टेशनों को बेहतर बनाने और हाई स्पीड रेलवे को बनाने पर भी चर्चा हुई. फ्रांस के प्रतिनिधि‍मंडल ने प्रभु को भरोसा दिलाया कि वो भारतीय रेल को तेज रफ्तार बनाने में पूरी मदद करेगी.

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रेल मंत्री सुरेश प्रभु रेल मंत्री सुरेश प्रभु

स्‍वपनल सोनल / सिद्धार्थ तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2016,
  • अपडेटेड 10:18 PM IST

मोदी सरकार रेलवे को बेहतर बनाने और रफ्तार बढ़ाने के लिए फ्रांस से सहयोग बढ़ाने जा रही है. रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने फ्रांस से आए सांसदों, फ्रांस रेलवे एसएनसीएफ और फ्रांसीसी उद्योगपतियों के साथ इस बारे में एक बैठक की है.

रेलभवन में शुक्रवार को तकरीबन एक घंटे चली इस बैठक में देश में रेलवे स्टेशनों को बेहतर बनाने और हाई स्पीड रेलवे को बनाने पर भी चर्चा हुई. फ्रांस के प्रतिनिधि‍मंडल ने प्रभु को भरोसा दिलाया कि वो बनाने में पूरी मदद करेगी. फ्रांसीसी कंपनियां नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को विकसित करने में भी दिलचस्पी ले रही हैं.

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डेढ़ साल में तैयार की गई रिपोर्ट
इस बैठक में दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर बुलेट कॉरीडोर में फ्रांस के सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई. दिल्ली-अमृतसर के बीच बुलेट ट्रेन के लिए रेल मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट के तमाम पहलुओं के बारे में रेलमंत्री को बताया गया. ये रिपोर्ट फ्रांस की कंपनी सिस्टा और भारतीय रेल की पीएसयू राइट्स ने मिलकर तकरीबन डेढ़ साल में तैयार की है.

दिल्ली-चंडीगढ़ बुलेट ट्रेन में लगेगा 8 साल का समय
पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए सिस्टा ने रेलमंत्री को पूरी योजना के बारे में समझाया. दिल्ली-चंडीगढ़ और अमृतसर के बीच चलाने में तकरीबन एक लाख करोड़ रुपये का खर्चा आएगा. इसको बनाने में तकरीबन 8 साल का समय लगने का अनुमान है और इस बुलेट ट्रेन को पीपीपी मोड में न चलाकर सरकारी खर्चे से ही चलाए जाने की बात की गई है. दिल्ली-अमृतसर बुलेट ट्रेन की फाइनल रिपोर्ट कर ली गई है और जल्द ही इस पर आगे की कार्रवाई होगी.

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458 किमी होगी रेलवे ट्रैक की लंबाई
इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-अमृतसर बुलेट ट्रेन की ट्रैक सोनीपत, पानीपत, अंबाला, चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर होते हुए बिछाई जाएगी. इस रेलवे लाइन की लंबाई 458 किलोमीटर होगी. इस ट्रैक पर दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन की रफ्तार 300 किलोमीटर प्रति घंटे से लेकर 350 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाएगी. खास बात ये है कि दिल्ली-अमृतसर के बीच दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन स्टैंडर्ड गेज पर चलाए जाने की सिफारिश की गई है. ट्रैक, रोलिंग स्टॉक और एस्कलेशन कॉस्ट को मिलाकर पूरे प्रोजेक्ट पर तकरीबन 1 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

शताब्दी फर्स्ट क्लास के बराबर होगा किराया
दिल्ली-अमृतसर बुलेट ट्रेन का किराया शताब्दी ट्रेन के प्रथम श्रेणी के किराए के बराबर रखे जाने की सिफारिश भी की गई है. रेल मंत्रालय के सीनियर अफसरों के मुताबिक सरकार की तरफ से दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर बुलेट ट्रेन चलाने को लेकर काम तेजी से शुरू करने और समय पर खत्म करने का दबाव मंत्रालय पर है.

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