सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार देश के जिला न्यायालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने राज्यों के हाई कोर्ट को ये सुनिश्चित करने को कहा है कि हर राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के कम से कम दो जिलों में बिना ऑडियो रिकॉर्डिंग के सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं.
सुप्रीम कोर्ट ने CCTV कैमरा लगाने के लिए तीन महीनों का वक्त तय किया है. कोर्ट ने अपने आदेश में ऐसे छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छूट दी है जहां हाई कोर्ट के लिए ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं है. कोर्ट ने कहा कैमरों को कोर्ट के भीतर और परिसर के अहम हिस्सों में लगाया जाए.
RTI के दायरे से बाहर
आपको बता दें कोर्ट में सीसीटीवी के जरिए होने वाली वीडियो रिकॉर्डिंग आरटीआई के तहत जनता के लिए
सार्वजनिक नहीं की जाएगी. सिर्फ संबंधित उच्च न्यायालयों के आदेश के बाद ही कोर्ट में सुनवाई की वीडियो को
सार्वजनिक किया जा सकेगा.
केंद्र सरकार भी न्यायपालिका में पारदर्शिता बढ़ाने के मकसद से कोर्ट रूम में कैमरा लगाने का समर्थन कर चुकी है. इसी के मद्देनजर दो जजों की बेंच ने कोर्ट की सुनवाई का इलैक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखने के लिए सीसीटीवी लगवाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस विषय पर लंबी चर्चा की जरुरत है और कोर्ट की तरफ से इस पर पूरी निगरानी रखी जाएगी.
कोर्ट रूम की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के मुद्दा काफी दिनों से चर्चा में था. साल 2013 से अलग-अलग कानून मंत्री सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को तीन बार पत्र लिखकर कोर्ट की कार्यवाही की वीडियो-ऑडियो रिकॉर्डिंग कराने की अपील कर चुके हैं.
अनुग्रह मिश्र