किसानों में गुस्सा क्यों? मोदी सरकार ने शुरू की ये योजनाएं, फिर कहां रह गई खामी

मध्य प्रदेश का मंदसौर और उसके आसपास के जिले इन दिनों किसानों के आंदोलन की आग में जल रहे हैं. यूं केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार शुरू से ही किसानों के मुद्दे जोरशोर से उठाती रही है. पीएम मोदी ने तो अगले 5 साल में यानि वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का ऐलान किया. इसके लिए उन्होंने कई योजनाएं भी शुरू की है. हालांकि जमीन पर किसानों की नाराजगी देखते हुए ऐसा लगता है कि ये योजनाएं मुसीबतों में घिरे किसानों को राहत पहुंचाने में नाकाफी साबित हुए.

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शाजापुर कृषि मंडी में नाराज किसानों ने हिंसा और आगजनी की शाजापुर कृषि मंडी में नाराज किसानों ने हिंसा और आगजनी की

साद बिन उमर

  • नई दिल्ली,
  • 09 जून 2017,
  • अपडेटेड 1:07 PM IST

मध्य प्रदेश का मंदसौर और उसके आसपास के जिले इन दिनों किसानों के आंदोलन की आग में जल रहे हैं. यूं केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार शुरू से ही किसानों के मुद्दे जोरशोर से उठाती रही है. पीएम मोदी ने तो अगले 5 साल में यानि वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का ऐलान किया. इसके लिए उन्होंने कई योजनाएं भी शुरू की है. हालांकि जमीन पर किसानों की नाराजगी देखते हुए ऐसा लगता है कि ये योजनाएं मुसीबतों में घिरे किसानों को राहत पहुंचाने में नाकाफी साबित हुए.

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तो पहले किसानों के लिए उठाए गए मोदी सरकार के कदमों पर नजर डालते हैं
I. मोदी सरकार ने खेतीहर जमीन की पैदावार बढ़ाने पर जोर देते हुए स्वाइल हेल्थ कार्ड योजना शुरू की. इसमें मिट्टी को देखकर उसी हिसाब से हर खेत के लिए अलग फर्टिलाइजर और बीज़ दिए जाते हैं.
II. खेतों का पैदावार बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अब सरकार नीम कोटेड यूरिया दे रही है. इससे यूरिया की कालाबाजारी पर लागम लगा है और किसानों को आसानी से यूरिया मिल जा रहा है.
III. मोदी सरकार ने इसके साथ ही 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' के मकसद से सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े बजट का प्रावधान किया है.
IV. इसके साथ ही अच्छी फसल होने पर नुकसान की रोकथाम के लिए कोल्ड स्टोरेज और वेयर हाउसिंग में भारी निवेश किया.
V. वहीं खेती के अलावा मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन वगैरह को भी बढ़ावा देने पर भी काम किया.

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हालांकि इन योजनाओं के बावजूद किसानों की बदहाली वैसी ही बनी हुई है. इससे किसानों में नाराजगी बढ़ी और यूपी में किसानों के कर्ज माफ होने के बाद मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के भी किसान अपने कर्ज माफ करने की मांग करने लगे. मध्य प्रदेश में प्याज की बंपर फसल हुई, तो कीमत जमीन पर पहुंच गए. इससे किसान कर्ज माफी और फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन करने लगे. इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत हो गई. इसके बाद देखते ही देखते राज्य के 7 जिलों में हिंसा फैल गई.

इसे मामले को लेकर सियासी पारा भी गर्मा गया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी किसानों से मिलने मंदसौर आ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया. इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार है.

यहां किसानों में पीएम मोदी की खामोशी को लेकर भी गुस्सा है. मंगलवार के बाद से पीएम मोदी ने ट्विटर पर बिम्सटेक देशों को शुभकामनाएं, शेर बहादुर देउबा को नेपाल का प्रधानमंत्री बनने पर बधाईं दी, योग के लाभ गिनाए, तो म्यांमार के विमान हादसे पर दुख व्यक्त किया. लेकिन किसानों की संवेदनाओं पर मरहम लगाने के लिए एक ट्वीट नहीं किया.

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किसानों से मिलने (AAP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस चुप्पी पर निशाना साधा है. AAP नेता संजय सिंह ने कहा, 'यूरोप, अफगानिस्तान या पाकिस्तान में अगर कोई छोटी सी घटना भी होती है, तो दुनिया में इस पर ट्वीट करने वाले पहले शख्स हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होते हैं. वह सबसे पहले इन पर बोलते हैं, लेकिन उन्होंने किसानों की मौत पर एक शब्द भी नहीं बोला.'

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