Tamil Fishermen Arrest: श्रीलंका ने 12 भारतीय मछुआरों को किया गिरफ्तार, समुद्री सीमा लांघने का आरोप

मछुआरे तमिलनाडु के रामेश्वरम से मछली पकड़ने के लिए निकले थे. श्रीलंका की नेवी का दावा है कि उन्होंने अपनी सीमा के अंदर नेदुन्थीवु टापू के नजदीक इन मछुआरों को गिरफ्तार किया है.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

प्रमोद माधव

  • चेन्नई,
  • 03 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 12:26 PM IST
  • गिरफ्तार किए गए मछुआरों से श्रीलंका के मयिलाट्टी टापू पर पूछताछ जारी
  • श्रीलंका की नेवी ने जब्त की भारतीय मछुआरों की नाव

आर्थिक बदहाली की मार झेल रहे श्रीलंका की भारत बढ़-चढ़कर मदद कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय मछुआरों पर श्रीलंका की कार्रवाई जारी है. श्रीलंका की नेवी ने 12 भारतीय मछुआरों को शनिवार सुबह गिरफ्तार कर लिया है.

श्रीलंका की नौसेना की गिरफ्त में आए मछुआरे तमिलनाडु के रामेश्वरम से मछली पकड़ने के लिए निकले थे. श्रीलंका की नेवी का दावा है कि उन्होंने अपनी सीमा के अंदर नेदुन्थीवु टापू के नजदीक इन मछुआरों को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए मछुआरों पर समुद्री सीमा का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है. उनकी नाव भी श्रीलंका की नेवी ने जब्त कर ली है. मछुआरों को पूछताछ के लिए श्रीलंका के मयिलाट्टी टापू पर रखा गया है.

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बता दें कि 25 मार्च 2022 में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने लोकसभा में बंदी बनाए गए भारतीय मछुआरों को लेकर किए गए सवाल का जवाब दिया था. उन्होंने कहा था कि श्रीलंका ने तमिलनाडू के मछुआरों को हिरासत में लिया है. सरकार श्रीलंका की सरकार से बात कर रही है. श्रीलंका ने 2020 में 74 मछुआरों को गिरफ्तार किया. 2022 में 96 मछुआरों को गिरफ्तार किया गया.

श्रीलंका में सड़कों पर हो रहा सरकार का विरोध

भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका इन दिनों आर्थिक बदहाली की चपेट में है. देश में दूध, दवाइयां, पानी, फल, सब्जियां समेत जरूरत की चीजों की किल्लत हो गई है. रोजमर्रा के सामान के दाम आसमान छू रहे हैं. आलम ये है दवा, दूध और पानी का संकट खड़ा हो गया है. देश में चाय की एक चुस्की लेने के लिए 80 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं. जिदंगी की सबसे बड़ी जरूरत पीने का पानी बहुत महंगा हो गया है.

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दिवालिया होने की कगार पर पहुंचा श्रीलंका

2019 से शुरू हुई आर्थिक तंगी अब इस हद तक पहुंच गई है कि पूरा देश दिवालिया होने की कगार पर है. इसका खामियाजा श्रीलंका की जनता भुगत रही है. बुनियादी चीजों की पूर्ति के लिए भी लोग मुसीबत झेल रहे हैं. सुपर मार्केट खाली हो गए हैं. ना बच्चों के लिए दूध है ना अंडे हैं न पीने का पानी है.

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