जम्मू: आर्मी कैंप पर हमले में रोहिंग्या कनेक्शन के दावे की ये है वजह

जम्मू के बाहरी इलाकों में बड़ी संख्या में रोहिंग्या पिछले काफी समय से शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं. जम्मू के छन्नी हिम्मत, नरवाल, बोहड़ी, नगरोटा, कासिम नगर, में इनकी संख्या ज्यादा है. सांबा में भी काफी संख्या में रोहिंग्याओं रह रहे हैं. जम्मू के कुछ संगठन इन रोहिंग्याओं को लेकर काफी समय से प्रदर्शन भी कर रहे हैं.

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जम्मू के सुंजवां में आतंकियों के खात्मे के लिए ऑपरेशन को अंजाम देते जवान जम्मू के सुंजवां में आतंकियों के खात्मे के लिए ऑपरेशन को अंजाम देते जवान

राहुल विश्वकर्मा

  • जम्मू,
  • 10 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 1:14 PM IST

जम्मू के सुंजवां में सेना के कैंप पर हुए फिदायीन हमले ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं. अब तक आतंकवादी कश्मीर में मौजूद सेना के कैंप को ही निशाना बनाते रहे हैं. लेकिन जम्मू में जिस तरह से ये हमला अंजाम दिया गया, उससे साफ है कि आतंकी सिर्फ कश्मीर तक ही नहीं सिमटे हुए हैं.

इस बीच जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर ने इस हमले में रोहिंग्याओं की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दे दिया है. हमले में अब रोहिंग्या कनेक्शन के दावे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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भौगोलिक रूप से देखें तो जिस जगह पर यह हमला हुआ है, वो जगह सुंजवां जम्मू के रिहायशी इलाके में है. सेना के कैंप के पास ही छन्नी हिम्मत, त्रिकुटा नगर जैसे इलाके हैं, जो घनी आबादी वाली जगह है. नेशनल हाईवे 44 के पास बने इस सेना के कैंप से जम्मू यूनिवर्सिटी की दूरी सात किलोमीटर से भी कम है.

सेना पर हुए आतंकी हमले पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर कविंद्र गुप्ता ने बड़ा बयान दे दिया है. उन्होंने कहा है कि जम्मू में हुए इस फिदाय़ीन हमले में रोहिंग्या का हाथ हो सकता है. उन्होंने आशंका जताई कि आतंकवादियों ने जम्मू में रह रहे रोहिंग्या को अपना हथियार बनाकर इस हमले को अंजाम दिया है.

जम्मू के बाहरी इलाकों में बड़ी संख्या में रोहिंग्या पिछले काफी समय से शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं. जम्मू के छन्नी हिम्मत, नरवाल, बोहड़ी, नगरोटा, कासिम नगर, में इनकी संख्या ज्यादा है. सांबा में भी काफी संख्या में रोहिंग्याओं रह रहे हैं. जम्मू के कुछ संगठन इन रोहिंग्याओं को लेकर काफी समय से प्रदर्शन भी कर रहे हैं.

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सरकार ने दिए हैं बिजली के कनेक्शन

जम्मू में बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं की संख्या काफी ज्यादा है. सरकार भी इसके खिलाफ अब तक कोई सख्त कार्रवाई करने की बजाए दोहरी नीति अपनाती दिख रही है. राज्य की बीजेपी-पीडीपी सरकार उन्हें बिजली के कनेक्शन दे रही है. यही नहीं पिछले सात सालों से अब तक इन शरणार्थियों से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का राजस्व बिजली बिल के रूप में जुटाया जा चुका है.

विभाग ने करोड़ों रुपए वसूले

बताया जा रहा कि वर्ष 2008 से 2017 तक 7,273 बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों को बिजली कनेक्शन दिए गए. इस दौरान इन कनेक्शनों से बिजली विभाग ने 142.53 लाख रुपये का बिजली बिल बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों से वसूल किया है.

बिजली विभाग का दावा- कनेक्शन अस्थाई

हालांकि जम्मू के बिजली विभाग का दावा है कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों को दिए गए यह कनेक्शन अस्थाई हैं. बिजली विभाग का यह भी दावा है कि उनके पास इन बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों ने स्थाई कनेक्शन के लिए भी आवेदन दिए हैं. इस कनेक्शन के लिए इन परिवारों ने आधार कार्ड, राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज भी दिए हैं.

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