इराक के मोसुल में मारे गए 38 भारतीय मजदूरों के परिवारों को केंद्र सरकार की ओर से 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है. इस मुआवजे का ऐलान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है.
दरअसल इराक के मोसुल में मारे गए 38 भारतीयों से अवशेष सोमवार को भारत लाए गए. सभी अवशेषों को विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह विशेष विमान से शव लेकर अमृतसर पहुंचे. बता दें कि इराक में जान गंवाने वालों में सबसे ज्यादा 27 लोग पंजाब के ही थे.
इस दौरान वीके सिंह ने बताया कि डीएनए मैच करना काफी मुश्किल था. उन्होंने कहा कि इराक में 40 भारतीयों का कोई रिकॉर्ड नहीं था. शव का पता लगाने में इराक सरकार की मदद के लिए ने उनका धन्यवाद किया. उन्होंने बताया था कि 38 लोगों के शव मिले, जबकि 39वें शव का डीएनए मैच किया जाना अभी बाकी है.
पंजाब सरकार देगी मुआवजा
अमृतसर एयरपोर्ट पर पार्थिव अवशेष लेने पहुंचे कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने मृतकों के परिवारवालों को 5-5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की थी. साथ ही ये भी कहा है कि हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी.
बिहार सरकार से भी नौकरी की मांग
इराक में मारे गए 39 भारतीयों में से 6 बिहार के रहने वाले थे, जिनमें से पांच के शव के अवशेष परिवार वालों को सुपुर्द करने के लिए मंगलवार सुबह सिवान पहुंचाए गए. वहीं ने मृतकों के परिवार वालों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि सरकार की तरफ से ये मदद नाकाफी है. पीड़ित परिवारों की मांग है कि उन्हें भी पंजाब सरकारी की तरह से बिहार सरकार नौकरी दे.
2014 में हुए थे अगवा
बता दें कि जून 2014 में उत्तरी मोसुल शहर पर कब्जा करने के तुरंत बाद ने इन मजदूरों को अगवा कर लिया था. जिसके बाद उनकी मौत को लेकर संशय बना हुआ था. बीते 20 मार्च को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में इस बात की पुष्टि की थी कि सभी भारतीय जो अगवा किए गए थे, उनकी मौत हो गई है.
अमित कुमार दुबे