कारपेंटरी स्किल्स की कला ने अद्भुत लकड़ी के ढांचे, फर्नीचर के सुंदर टुकड़े और रोजमर्रा की लकड़ी की वस्तुओं व इमारतों से आश्चर्यचकित कर दिया है. कारपेंटरी इंडस्ट्री के ग्रोथ की बात कि जाए तो दूसरे क्षेत्र की तुलना में 15 फीसदी ज्यादा ग्रोथ देखी गई है.
वहीं, कारपेंटरी का एक हिस्सा एक्सपोर्ट भी किया जाता है. इस पेशे में प्रवेश करना बहुत सारी बारीकियों को शामिल करता है और समय-समय पर कला और कौशल को भी दर्शता है. लेकिन कारपेंटरी के क्षेत्र में अपने करियर के लक्ष्य को प्राप्त करने पर विचार करने के लिए कुछ चीजों को जानना जरूरी है.
कारपेंटरी स्किल्स की बात करें तो इसके तहत आमतौर पर लकड़ी के ढांचे के साथ काम होता है. लकड़ी से बने सामान और फर्नीचर का निर्माण होता है. इसके तहत लकड़ी से सीढ़ी, दरवाजे, मॉड्यूलर आदि के फ्रेम को भी ठीक किया जाता है.
पूरी दुनिया में कारपेंटरी स्किल्स को एक कौशल के रूप में जाना जाता है. भारतीय स्किल्स डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सुरजीत सिंह पाबला के मुताबिक भारत में कारपेंटरी के पेशे को वो आयाम नहीं मिला है जिसका वो हकदार है.
हालांकि, भारतीय स्किल्स डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी ने एक डिग्री कोर्स शुरू किया है. पूरे देश में एकमात्र ऐसी यूनिवर्सिटी है जो बच्चों को कारपेंटरी में पीएचडी की डिग्री तक प्रदान करती है.
कारपेंटर इंटीरियर डिजाइनिंग के क्षेत्र में भी हाथ आजमा सकता है. हालांकि, शुरुआत में कुछ स्किल्स की आवश्यकता होती है और जिसे एक प्रोफेशनल डिग्री के तहत हासिल किया जा सकता है.
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