भारतीय नौसेना का इंतजार बढ़ा, 111 हेलिकॉप्टर की डील के लिए पार्टनर तय नहीं

नौसेना ने पहले तीन विदेशी और चार निजी भारतीय कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया था, लेकिन हाल ही में एक विमर्श मे कहा गया कि सरकारी स्वामित्व वाले हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को रणनीतिक साझेदार होना चाहिए.

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नौसेना को हेलिकॉप्टर मिलने में हो रही है देरी (प्रतीकात्मक तस्वीर- रॉयटर्स) नौसेना को हेलिकॉप्टर मिलने में हो रही है देरी (प्रतीकात्मक तस्वीर- रॉयटर्स)

अभि‍षेक भल्ला

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2020,
  • अपडेटेड 11:41 AM IST

  • सहमति न बन पाने की वजह से हो रही निर्माण में देरी
  • डील के तहत नौसेना को मिलेंगे 111 हेलिकॉप्टर

आत्मनिर्भरता नया मंत्र है. लेकिन घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विदेशी कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी मॉडल के आधार पर 111 हेलीकॉप्टर्स हासिल किए जाने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है. ये नेवल यूटिलिटी हेलीकॉप्टर्स (NUH) भारतीय नौसेना ने हासिल करने थे. इसकी वजह रक्षा मंत्रालय में इस बात पर आम सहमति नहीं बन पाना है कि भारतीय पार्टनर प्राइवेट सेक्टर से हो या सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी हो.

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सूत्रों ने बताया कि नौसेना ने पहले तीन विदेशी और चार निजी भारतीय कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया था, लेकिन हाल ही में एक विमर्श मे कहा गया कि सरकारी स्वामित्व वाले हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को रणनीतिक साझेदार होना चाहिए. इसकी वजह से मामले में देरी हुई. अब एक ऐसी राय है कि रक्षा सार्वजनिक सेक्टर उपक्रम (DPSU) को मंजूरी दी जाए या नही. HAL भी DPSU उपक्रम है.

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एक अधिकारी के मुताबिक प्राइवेट भारतीय उद्योग के साथ जाने का फैसला अगस्त 2018 में लिया गया था. भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाने के हेलीकॉप्टर्स को शामिल करने 21,000 करोड़ का ये प्रोजेक्ट बहुत अहम है.

चेतक की जगह ले सकते हैं नए हेलिकॉप्टर

ये हेलीकॉप्टर युद्धपोतों से उड़ान भर सकते हैं. इनका इस्तेमाल राहत और बचाव के कामों, हताहतों को निकालने, कम तीव्रता वाले मरीन ऑपरेशन्स और टॉरपीडो गिराने के लिए किया जा सकता है. ये पुराने हो चुके चेतक हेलीकॉप्टर्स का स्थान लेंगे. रक्षा मंत्रालय को अभी NUH के लिए प्रस्ताव का आग्रह (RFP) भेजना है. इससे एक विदेशी कंपनी के सहयोग से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के लिए रास्ता साफ होगा.

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विदेशी भागीदारी के तहत देश में बनेंगे हेलिकॉप्टर

रणनीतिक साझेदारी मॉडल का उद्देश्य भारतीय निर्माताओं और विदेशी फर्मों के बीच सहयोग करना है जो टेक्नोलॉजी साझा करने के लिए तैयार हैं और फिर भारतीय प्रोडक्शन लाइन्स को सेट अप करें. रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत एक और प्रोजेक्ट छह स्वदेशी पनडुब्बियों का निर्माण करना है. इस प्रोजेक्ट के आगे बढ़ने में कुछ प्रगति हुई. इसके लिए दो भारतीय और पांच विदेशी कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है.

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रक्षा मंत्रालय ने 12 फरवरी, 2019 को भारतीय नौसेना के लिए 111 NUH हेलीकॉप्टर्स की खरीद के लिए संभावित भारतीय रणनीतिक भागीदारों और विदेशी ओईएम को शॉर्टलिस्ट करने के लिए ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ जारी किया था.

मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत होगा काम

111 हेलीकॉप्टरों में से 95 हेलीकॉप्टर भारत में चयनित भारतीय रणनीतिक साझेदार की ओर से बनाए जाएंगे. विदेशी फर्मों को हेलीकॉप्टरों के लिए समर्पित मैन्युफैक्चरिंग लाइन सेट अप करनी होंगी जिनमें डिजाइन, इंटीग्रेशन और भारत में हेलीकॉप्टर्स की मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया शामिल है.

साथ ही भारतीय मैन्युफैक्चरिंग लाइन को NUH प्लेटफॉर्म के लिए ग्लोबल एक्सक्लूसिव फैसिलिटी बनाना होगा. रणनीतिक साझेदारी मॉडल के जरिए सरकार का लक्ष्य रक्षा आयात को कम करना है जो मौजूदा स्थिति में सैन्य आपूर्ति का 60 प्रतिशत बैठता है.

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