तीन तलाक कानून से खुश मुस्लिम महिलाएं, PM मोदी को कहा शुक्रिया

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी लगातार यह दावा करते आ रहे हैं कि जब से ये कानून बना है, तब से मुस्लिम बहनों की जगह तलाक देने वाले डरने लगे हैं.

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सरकार का दावा, तीन तलाक कानून आने से कम हुए केस (PTI फोटो) सरकार का दावा, तीन तलाक कानून आने से कम हुए केस (PTI फोटो)

अशोक सिंघल

  • नई दिल्ली,
  • 01 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 7:45 PM IST

  • तीन तलाक के मामलों में 80 फीसदी से ज्यादा की कमी
  • मुस्लिम महिलाओं ने पीएम को राखी बांधकर कहा शुक्रिया
वाराणसी की अलीमुनिसा आज बहुत खुश हैं. वो तीन तलाक को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते नहीं थकतीं. प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में अलीमुनीसा जैसी कई मुस्लिम महिलाओं ने मोदी की तस्वीर को राखी बांध कर दुआ मांगी कि प्रधानमंत्री उनकी ऐसे ही हिफाजत करते रहें.

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मुजफ्फरनगर की रीनाजहां भी अलीमुनिसा की तरह तीन तलाक के खिलाफ कानून को मुस्लिम महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं बताती हैं. मुजफ्फरनगर के कलेक्ट्रेट में मुस्लिम महिलाएं हाथों में बैनर लेकर प्रधानमंत्री का शुक्रिया करती नजर आईं.

ये दो बानगी है, तीन तलाक के खत्म होने पर मुस्लिम महिलाएं देश के अलग-अलग हिस्सों में किस तरह अपने जज्बात का इजहार कर रही हैं. तीन तलाक के खिलाफ कानून बने आज पूरा एक साल हो गया. संसद के दोनों सदनों में कानून पास होने के बाद 1 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने इस पर हस्ताक्षर किए थे.

सरकार का दावा है कि ''मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण कानून'' बनने के बाद देश में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की घटनाओं में 80 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है.

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी लगातार यह दावा करते आ रहे हैं कि जब से ये कानून बना है, तब से मुस्लिम बहनों की जगह तलाक देने वाले डरने लगे हैं.

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सरकार की ओर से इस संबंध में जो आंकड़े जारी किए गए हैं, उसका आधार थानों में दर्ज हुईं एफआईआर को भी माना गया है. तीन तलाक को लेकर कानून बनने के बाद पिछले एक साल में कितनी एफआईआर कम हुईं, यह भी एक पैमाना है. इसके अलावा अलग-अलग वक्फ बोर्ड, अल्पसंख्यक आयोग और स्थानीय प्रशासन की ओर से भी आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं.

आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में एक साल में तीन तलाक के सिर्फ 281 केस सामने आए हैं. 1985 से लेकर अगस्त 2019 तक राज्य में तीन तलाक के 63,400 मामले सामने आए थे.

इसी तरह बिहार की बात की जाए तो 1985 से 2019 के 34 साल में 38,617 की तुलना में बीते एक साल में सिर्फ 49 केस सामने आए. कानून बनने के बाद राजस्थान में 83, हरियाणा में 26, आंध्र प्रदेश में 203, महाराष्ट्र में 102, केरल में 19, तमिलनाडु में 26, असम में 17, पश्चिम बंगाल में 201 और मध्य प्रदेश में 32 केस दर्ज हुए.

सरकार का दावा है कि कानून बनने से पहले 34 साल का औसत निकाला जाए तो हर साल देश में औसतन तीन तलाक के 11,263 केस दर्ज होते थे जबकि कानून बनने के बाद एक साल में सिर्फ 1039 मामले सामने आए.

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नकवी जोर देकर कहते हैं, “तीन तलाक के खिलाफ जो कानून बना है उससे लोगों में डर पैदा हुआ है. एक अगस्त की तारीख इतिहास में मुस्लिम महिला अधिकार दिवस के रूप में दर्ज हो चुकी है. इस कानून से मुस्लिम महिलाओं की आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को मजबूती मिली है.”

नकवी के मुताबिक मोदी सरकार ने तीन तलाक की कुरीति को खत्म कर मुस्लिम महिलाओं के समानता के अधिकार को सुनिश्चित किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के चलते वर्षों तक मुस्लिम महिलाओं को उनके मूलभूत और संविधानिक अधिकारो से वंचित रखा.

दुनिया के और देशों की बात की जाए तो मिस्र पहला अहम इस्लामी देश है जिसने 1929 में तीन तलाक पर रोक लगाई. पड़ोसी मुल्कों की बात की जाए तो पाकिस्तान 1956 में और बांग्लादेश अपने अस्तित्व में आने के एक साल बाद ही 1972 में तीन तलाक को खत्म कर चुके हैं.

(मुजफ्फरनगर में संदीप सैनी और वाराणसी में रोशन जैसवाल के इनपुट्स के साथ)

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