मिस्त्री का बड़ा आरोप, बोले- अगस्ता स्कैम में टाटा संस के डायरेक्टर की अहम भूमिका

यूपीए शासनकाल में हुए 3600 करोड़ रुपये के अगस्ता हेलीकॉप्टर डील में कथित घूसखोरी के मामले में पूर्व वायु सेना प्रमुख एस पी त्यागी समेत संजीव त्यागी और वकील गौतम खेतान को सीबीआई ने हाल ही में गिरफ्तार किया था.

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साइरस मिस्त्री साइरस मिस्त्री

लव रघुवंशी

  • नई दिल्ली,
  • 11 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 10:47 PM IST

टाटा संस और साइरस मिस्त्री के बीच चल रहा आरोप-प्रत्यारोप का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है. साइरस मिस्त्री ने अब दावा किया है कि टाटा संस के निदेशक विजय सिंह ने अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में अहम भूमिका निभाई है. विजय सिंह टाटा संस की उस नामांकन और पारिश्रमिक समिति के सदस्य थे, जिसने 28 जून, 2016 को मिस्त्री के प्रदर्शन की समीक्षा की थी.

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मिस्त्री ने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और केंद्रीय रक्षा सचिव के रूप में विजय सिंह का कोई खास योगदान नहीं था. मिस्त्री ने आरोप लगाया है कि वह कंपनी के चेयरमैन पद से उनके निष्कासन के लिए रतन टाटा की साजिश में अपनी भूमिका को सही साबित करने को तरह तरह के सिद्धांत गढ़ रहे हैं.

मिस्त्री के आरोपों को नकारते हुए भूतपूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह ने कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड सौदे को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी. अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले से मुझे जोड़ना झूठ और दुर्भावनापूर्ण है.

घोटाले में हुई इनकी गिरफ्तारी
यूपीए शासनकाल में हुए 3600 करोड़ रुपये के अगस्ता हेलीकॉप्टर डील में कथित घूसखोरी के मामले में पूर्व वायु सेना प्रमुख एस पी त्यागी समेत संजीव त्यागी और वकील गौतम खेतान को सीबीआई ने हाल ही में गिरफ्तार किया था. 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की खरीद में 450 करोड़ रुपये की घूसखोरी से जुड़े इस मामले में एसपी त्यागी के रिश्तेदार संजीव त्यागी और वकील गौतम खेतान की भी गिरफ्तारी हुई है.

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इससे पहले टाटा संस ने साइरस मिस्त्री पर नया आरोप लगाते हुए कहा है कि रतन टाटा की जगह नए चेयरमैन के चयन के लिए 2011 में गठित चयन समिति को उन्होंने गुमराह किया था. मिस्त्री ने टाटा समूह के लिए योजनाओं पर बड़े-बड़े बयान दिए, लेकिन वादे के अनुरूप इसके लिए प्रभावी प्रबंधन ढांचा और योजना नहीं दी.

टाटा संस की ओर से दिए गए बयान में कहा गया कि मिस्त्री ने वादे के अनुरूप पारिवारिक उपक्रम शापोरजी पल्लोनजी से दूरी नहीं बनाई. मिस्त्री के प्रतिबद्धता से मुंह मोड़ने से ही निजी हितों से अछूते रह कर टाटा समूह का नेतृत्व करने की उनकी क्षमता को लेकर चिंता पैदा हुई. बयान में कहा गया कि लाभांश आय (टीसीएस को छोड़कर) में लगातार गिरावट आई. मिस्त्री के कार्यकाल में कर्मचारियों की लागत दोगुना से अधिक हो गई.

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