आतंकवादी हमलों से 6 गुना ज्यादा मौत का कारण है प्यार

भारत में मौतों को लेकर एक हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है. जिसके मुताबिक भारत में जितनी मौतें प्यार की वजह से होती हैं उतनी आतंकी घटनाओं से भी नहीं होती.

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आतंकवाद से ज्यादा जान लेता है प्यार आतंकवाद से ज्यादा जान लेता है प्यार

जावेद अख़्तर

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  • 02 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 10:51 AM IST

भारत में मौतों को लेकर एक हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है. जिसके मुताबिक भारत में जितनी मौतें प्यार की वजह से होती हैं उतनी आतंकी घटनाओं से भी नहीं होती. आंकड़े के मुताबिक पिछले 15 सालों में भारत में आतंकवाद से ज्यादा मौत प्यार के चलते हुईं. साथ ही हत्याएं, हत्याओं की कोशशि और किडनैपिंग के केस की वजह भी प्यार ही रहा. एकतरफा प्यारा, प्यार में शादी या परिवार की नाराजगी इसकी बड़ी वजह रही.

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ये आकंड़े साल 2001 से 2015 के बीच के हैं. आकंड़ों के मुताबिक प्यार में कामयाब न होने वाले और दूसरी वजहों के चलते करीब 79,189 लोगों ने मौत को गले लगाया. प्यार के चलते 38,585 मामलों में लोगों ने हत्या और गैर-इरादतन हत्या जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम दिया. जबकि इस दौरान आतंकवादी घटनाओं में 20,000 लोगों की मौत हुई.

इस दौरान एक और चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया. इन 15 सालों में किडनैपिंग के 2.6 लाख केस ऐसे दर्ज किए गए, जिनमें महिला के अपहरण की वजह उससे शादी रचाने का इरादा था. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक भारत में हर दिन 7 हत्याएं, 14 आत्महत्याएं और 47 अपहरण के पीछे की वजह हैरान करने वाली हैं. जिसमें प्यार के चलते परिवार की नाराजगी, और शादी के इरादा बड़ी वजह रहीं. दूसरी तरफ इन 15 सालों में आतंकवादी घटनाओं में 20,000 लोगों की मौत हुईं. इनमें सुरक्षा बल और आम नागरिक दोनों शामिल हैं.

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ये राज्य हैं आगे
जो आंकड़े सामने सामने आए हैं उनमें आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश का नाम शामिल है. इन राज्यों में से की गई हत्याओं के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए. इन सभी राज्यों में 15 साल के दौरान 3,000 से ज्यादा हत्याएं प्रेम प्रसंगों के चलते हुईं. जबकि सबसे ज्यादा आत्महत्याएं पश्चिम बंगाल में दर्ज की गईं. यहां बीते 14 सालों में प्रेम संबंधों के चलते 15,000 आत्महत्याओं के केस दर्ज किए गए. दूसरे नंबर पर तमिलनाडु है, जहां प्रेम प्रसंगों के चलते 9,405 लोगों ने मौत को गले लगाया.

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