लोकसभा में सुमित्रा महाजन ने सुनाई स्वरचित कविता, तालियों से गूंजा सदन

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सुमित्रा महाजन ने अपनी कविता सुनाकर सभी सांसदों को मंत्र मुग्ध कर दिया. बजट सत्र के दूसरे चरण में आज चौथे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने महिलाओं को बधाई दी. इस दौरान उन्होंने स्वरचित कविता सुनाई.

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लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन

राम कृष्ण / मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने गुरुवार को एक अनोखी पहल की. महाजन ने 'भारत की महिला' पर लिखी अपनी कविता सुनाकर सभी सांसदों को मंत्र मुग्ध कर दिया. बजट सत्र के दूसरे चरण में आज चौथे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने महिलाओं को बधाई दी. इस दौरान उन्होंने स्वरचित कविता सुनाई.

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वहीं, सदन में मौजूद सभी सांसदों ने तालियां बजाकर देश-दुनिया की महिलाओं को महिला दिवस की शुभकमनाएं दी. सुमित्रा महाजन ने कविता सुनाते हुए कहा, "नहीं किसी की अरी, वह है भारत की नारी, फिर भी रही सदा ताड़न की अधिकारी." महाजन ने कहा, ''हमेशा कहा जाता है कि अबला जीवन, तुमारी यही कहानी. मैं कहती हूं कि सबला बनकर लिखो एक नई कहानी, मन में हो विश्वास बनो स्वाभिमानी, राष्ट्र अभिमानी.''

अध्यक्ष ने कहा, ''आज सुबह मैं कई महिला सांसदों से मिलीं, जो अपने राज्य विशेष की साड़ी पहनकर आई हैं. ये उनकी पहचान को दिखता है. मैं सिर्फ महिलाओं को ही नहीं, बल्कि सभी को संसद की तरफ से महिला दिवस की शुभकामनाएं देती हूं.''

वहीं, राज्यसभा में सभापति वेंकैया नायडू ने भी देश और दुनिया की सभी महिलाओं को सदन की ओर से की शुभकामनाएं दीं. इस मौके पर सभापति ने एक प्रस्ताव लाने की बात भी कही. राज्यसभा में महिला दिवस के मौके पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद अंबिका सोनी ने महिला दिवक से मौके पर अपनी बात रखी.

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उन्होंने कहा कि देश में आज भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा हासिल नहीं है, उन्होंने इसके लिए महिला आरक्षण बिल को पारित कराने पर जोर दिया. सांसत अंबिका ने कानून के जरिए महिलाओं को सुरक्षा और सदन में 33 फीसद आरक्षण की मांग की. कांग्रेस की सांसद रेणुका चौधरी ने भी महिला दिवस के मौके पर महिला के खिलाफ होने वाले अपराध पर लगाम लगाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि महिलाओं को सदन में नहीं बल्कि हर जगह बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए.

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