सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का केरल सरकार ने समर्थन किया है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बुधवार को केरल सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए सहमति जताई.
केरल सरकार ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश के समर्थन में है. वहीं, सरकार के इस स्टैंड पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने सवाल उठाते हुए कहा कि ये आपने चौथी बार स्टैंड बदला है. जस्टिस रोहिंगटन ने कहा कि केरल वक्त के साथ बदल रहा है. गौरतलब है कि 2015 में केरल सरकार ने महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया था लेकिन 2017 में उसने अपना रुख बदल दिया था. जिसके बाद अब फिर उसने सहमति जताई है.
केरल के ऐतिहासिक में 10 से 50 साल आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी से संबंधित मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी में कहा कि देश में प्राइवेट मंदिर का कोई सिद्धांत नहीं है और मंदिर प्राइवेट संपत्ति नहीं है ये सावर्जनिक संपत्ति है. चीफ जस्टिस ने कहा, 'ऐसे में सावर्जनिक संपत्ति में अगर पुरुष को प्रवेश की इजाजत है तो फिर महिला को भी प्रवेश की इजाजत मिलनी चाहिए. एक बार मंदिर खुलता है तो उसमें कोई भी जा सकता है.'
बता दें कि पत्थनमथिट्टा जिले के पश्चिमी घाट की पहाड़ी पर स्थित सबरीमाला मंदिर के प्रबंधन ने शीर्ष अदालत से पहले कहा था कि रजस्वला अवस्था की वजह से वे 'शुद्धता' बनाए नहीं रख सकती हैं, इसलिए 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश मंदिर में वर्जित है.
इस मामले में सात नवंबर, 2016 को केरल सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था कि वह ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में है. शुरूआत में राज्य की ने 2007 में प्रगतिशील रूख अपनाते हुए मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की हिमायत की थी जिसे कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार ने बदल दिया था.
यूडीएफ सरकार का कहना था कि वह 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित करने के पक्ष में है क्योंकि यह परपंरा अति प्राचीन काल से चली आ रही है. अब केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए एक बार फिर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सहमति जताई है.
जावेद अख़्तर / संजय शर्मा