बेनामी संपत्ति पर घिरे मायावती के भाई, आयकर विभाग ने शुरू की जांच

मायावती के भाई आनंद कुमार पर आरोप है कि उन्होंने प्राइवेट बिल्डरों के साथ गठजोड़ से बेनामी संपत्तियां बनाई हैं. बिल्डरों के आनंद कुमार के साथ संबंध है और उन्होंने उनकी आवास परियोजनाओं में खूब काले धन निवेश किया है.

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लव रघुवंशी / शिवेंद्र श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 26 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 11:53 PM IST

नोटबंदी के मसले पर मोदी सरकार को लगातार घेरने वाली मायावती सवालों के घेरे में आ गई हैं. आयकर विभाग ने उनके भाई आनंद कुमार के खिलाफ बेनामी संपत्ति के मामले में जांच तेज कर दी है. इस बीच दिल्ली में करोलबाग स्थित यूनियन बैंक के ब्रांच के एक खाते में मायावती के भाई के आनंद कुमार के नाम जमा 1.43 करोड़ रुपये को प्रवर्तन निदेशालय(ED) ने जब्त कर लिया है. जबकि इस ब्रांच में बीएसपी के खाते में 104 करोड़ रुपये जमा कराने के बारे में भी ED ने खुलासा किया है. मिल रही जानकारी के मुताबिक ये रकम नोटबंदी के बाद खाते में जमा की गई थी.

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वहीं आईटी विभाग को कई गुप्त जानकारियां मिली थीं कि आनंद कुमार के पास कई बेनामी संपत्तियां जमा किए हुए हैं.

इस संबंध में नोएडा के कई बिल्डर्स को नोटिस भेजा गया है. पर आरोप है कि उन्होंने प्राइवेट बिल्डरों के साथ गठजोड़ से बेनामी संपत्तियां बनाई हैं. बिल्डरों के आनंद कुमार के साथ संबंध है और उन्होंने उनकी आवास परियोजनाओं में खूब काले धन निवेश किया है. आयकर विभाग ने इन बिल्डरों से जमीनों के संबंध में जानकारी मांगी है.

नोटबंदी के बाद मायावती लगातार मोदी सरकार को घेरने में लगी हुई हैं. ऐसे में बीजेपी उन पर पलटवार कर सकती है. सोमवार को मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि नोटबंदी का फैसला जल्दबाजी में ले लिया और अब यह उनके लिए गले की फांस बन गया है. अपने चोर दरवाजे से बीजेपी ने पूंजीपतियों और धन्नासेठों का बहुत पैसा बहाया है.

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साल की आखिरी 'मन की बात' कार्यक्रम में पीएम मोदी ने पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत सरकार पर बेनामी संपत्ति से जुड़े कानून को कई दशकों तक ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वर्तमान सरकार ने बेनामी संपत्ति कानून को धारदार बनाया है और आने वाले दिनों में यह कानून अपना काम करेगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि आपको मालूम होगा हमारे देश में बेनामी संपत्ति का एक कानून है. 1988 में बना था, लेकिन कभी भी न उसके नियम बनें, उसको अधिसूचित नहीं किया. ऐसे ही वो ठंडे बस्ते में पड़ा रहा. हमने उसको निकाला है और बड़ा धारदार बेनामी संपत्ति का कानून हमने बनाया है. आने वाले दिनों में वो कानून भी अपना काम करेगा. देशहित के लिए, जनहित के लिए, जो भी करना पड़े, ये हमारी प्राथमिकता है.

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