प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए लगी बोली, IRCTC समेत कई कंपनियां शामिल

भारतीय रेलवे देश में प्राइवेट ट्रेनों के परिचालन को लेकर तेजी से काम कर रहा है. रेलवे ने कंपनियों के साथ हुई अहम बैठक में कहा कि प्राइवेट ट्रेन चलाने की इच्छुक कंपनियां अपनी पसंद से ट्रेन खरीद सकेंगी या लीज पर ले सकेंगी.

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प्राइवेट ट्रेन चलाने की कोशिशों में जुटा रेलवे (फाइल-पीटीआई) प्राइवेट ट्रेन चलाने की कोशिशों में जुटा रेलवे (फाइल-पीटीआई)

मिलन शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 7:51 AM IST

  • रेलवे के साथ बैठक में 16 कंपनियों ने हिस्सा लिया
  • IRCTC के अलावा GMR और BHEL भी रेस में

भारतीय रेलवे देश में तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्राइवेट ट्रेनों को शुरू करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है. इस संबंध में रेलवे ने मंगलवार (21 जुलाई) को देश में प्राइवेट ट्रेन चलाने की इच्छुक 16 कंपनियों के साथ बैठक की और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 16 में से 11 कंपनियों ने प्राइवेट ट्रेन के परिचालन बोली में हिस्सा लिया.

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सूत्रों के अनुसार, प्राइवेट ट्रेन चलाने को लेकर ऑपरेशन बोली में शामिल होने वाली कई बड़ी कंपनियों के नाम सामने आए हैं जिसमें IRCTC प्रमुख है. इसके अलावा जीएमआर समूह (The GMR group), बॉम्बार्डियर इंडिया (Bombardier India), सीएएफ, राइट्स, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (BHEL), मेधा समूह, आरके एसोसिएट्स, स्टरलाइट पावर, भारत फोर्ज और जेकेबी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं.

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रेलवे के साथ हुई अहम बैठक में रेलवे ने कंपनियों से कहा कि प्राइवेट ट्रेन चलाने की इच्छुक कंपनियां अपनी पसंद से ट्रेन खरीद सकेंगी या लीज पर ले सकेंगी. साथ ही रेल मंत्रालय और नीति आयोग से जुड़े अधिकारियों ने निजी कंपनियों के प्राइवेट ट्रेनों के परिचालन से जुड़ी उनकी शंकाओं का समाधान भी किया.

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रेल मंत्रालय पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर देशभर में प्राइवेट ट्रेन चलाने की अपनी महात्वाकांक्षी परियोजना पर काम रहा है. इसी सिलसिले में रेलवे ने देशभर के 109 जोड़ी रूटों पर 151 आधुनिक यात्री रेलगाड़ियां चलाने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए. ये 151 ट्रेनें अभी चल रही ट्रेनों से अलग होंगी.

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इसके लिए रेलवे ने 12 आवेदन आमंत्रित किए थे. रेलवे की कोशिश राजस्व बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर है. भारतीय रेलवे का अनुमान है कि इस स्कीम के कारगर होने से रेलवे में 30,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश होगा. इनकी वजह से पैसेंजर सर्विस सेक्टर में मांग और आपूर्ति के बीच बनी खाई को भी पाटा जा सकेगा.

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