भारत ने कश्मीर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के बयान पर पलटवार करते हुए उसे बेहद खेदजनक बताया है. साथ ही कहा है कि दूसरे देश के आंतरिक मामले में बयानबाजी करने की बजाए इस्लामाबाद को अपनी सरजमीं पर सक्रिय आंतकवादी ठिकानों को ध्वस्त करना चाहिए.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इमरान के बयान के बारे में पूछे जाने पर कहा कि आतंक और हिंसा को समर्थन देकर बातचीत पर पाकिस्तान का धोखेबाजी भरा रुख पूरी दुनिया के सामने उजागर हो गया है.
कश्मीर में हिंसा पर खान ने सोमवार को कहा कि वक्त आ गया है कि भारत को यह समझना चाहिए कि उसे कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव और कश्मीर की जनता की इच्छा के अनुरूप बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए आगे बढ़ना चाहिए.
खान ने ट्वीट किया, ‘भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा...बेगुनाह कश्मीरियों की हत्या के नए चक्र की कड़ी निंदा करता हूं.’ इस पर रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तानी नेतृत्व को अपने अंदरूनी मामलों को देखना चाहिए और अपने मुद्दों को सुलझाना चाहिए.
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में इन दिनों निकाय चुनाव चल रहे हैं. इस बीच, लगातार स्थानीय लोगों और सेना के बीच झड़प की खबरें आती रही हैं. इसके अलावा सेना के द्वारा घाटी में छुपे आतंकियों के खिलाफ भी लगातार ऑपरेशन चलाया जाता है. अब इन्हीं घटनाओं को ढाल बना इमरान खान ने भारत पर आरोप लगाए हैं.
आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद पर काबिज होने के बाद इमरान खान ने इस तरह कश्मीर का राग अलापा है. इससे पहले भी वह लगातार इस तरह की बातें करते आए हैं.
इससे पहले सरकार गठन के कुछ दिनों बाद ही इमरान सरकार में मंत्री शिरीन मजारी ने दावा किया था कि उनकी सरकार कश्मीर मसले को सुलझाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर रही है. हालांकि, बाद में इस प्रकार का कोई प्रस्ताव सामने नहीं आया था.
कुछ दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले पाकिस्तान की ओर से भारत के साथ न्यूयॉर्क में ही बातचीत का प्रस्ताव दिया गया था. जिसे भारत ने पहले स्वीकार कर लिया था पर बाद में आतंकियों द्वारा जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान की हत्या के बाद ये बातचीत रद्द हो गई थी.
यूएन में भी अपने भाषण के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को लताड़ लगाई थी. सुषमा ने पाकिस्तान को उनकी जमीन से भारत में आतंकियों को भेजने और आतंकी घटनाओं को अंजाम देने पर कड़ी फटकार लगाई थी.
अनुग्रह मिश्र