कांग्रेस बोली- कश्मीर पर सरकार की एडवाइजरी से खौफ, चुनाव में भुनाना है मकसद

गुलाम नबी आजाद ने कहा, कश्मीर और लद्दाख के लोग गृह मंत्रालय की एडवाइजरी के बाद काफी डरे हुए हैं. ऐसा तो तब भी नहीं हुआ, जब घाटी में आतंक चरम पर था.

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद (ANI) वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद (ANI)

तनुश्री पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 5:42 PM IST

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने जम्मू कश्मीर के मौजूदा हालात पर कहा है कि कश्मीर में जो हो रहा है, वह हम सभी के लिए बेहद चिंताजनक है. इस वक्त घाटी में अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात करना चिंताजनक है. आजाद ने शनिवार को मीडिया से कहा, कश्मीर और लद्दाख के लोग गृह मंत्रालय की एडवाइजरी के बाद काफी डरे हुए हैं. ऐसा तो तब भी नहीं हुआ, जब घाटी में आतंक चरम पर था.'

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जम्मू कश्मीर में अचानक अमरनाथ यात्रा के रोके जाने और जवानों की तैनाती बढ़ाए जाने को लेकर सूबे में सियासी हलचल तेज हो गई है. केंद्र के एक्शन पर कांग्रेस के अलावा पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस हैरान हैं. इसी को लेकर शुक्रवार को महबूबा मुफ्ती राज्यपाल से मिलीं तो शनिवार को उमर अब्दुल्ला ने सत्यपाल मलिक से मुलाकात कर आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की.

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'अतीत में, यहां तक कि मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी, नरसिम्हा राव के शासन में ऐसा कभी नहीं हुआ कि तीर्थयात्रियों को वापस घर लौटने के लिए कहा गया. पूर्व में ऐसी स्थिति कभी नहीं पनपी. यह अभूतपूर्व है.' आजाद ने कहा कि सरकार जो कुछ कश्मीर में कर रही है, उसे अन्य राज्यों के चुनावों में भुनाना चाहती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में संसद में बयान दें.

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गुलाम नबी आजाद ने कहा कि बीजेपी घाटी में नफरत फैलाना चाहती है. पर्यटकों का हर कश्मीरी खुले दिल से स्वागत करता है लेकिन सरकार लोगों में खौफ पैदा करना चाहती है और घाटी के स्थानीय लोगों में नफरत फैला रही है.' आजाद ने कहा, जहां तक स्नाइपर और हथियार बरामद होने की बात है तो जब मैं वहां का मुख्यमंत्री था, तब भी वहां ऐसा होता था लेकिन हमने अमरनाथ यात्रा कभी नहीं रोकी.

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि '35ए को समाप्त करना राजनीति से प्रेरित है. पूर्वोत्तर में 8 ऐसे राज्य हैं जहां आप जमीन नहीं खरीद सकते. हिमाचल और उत्तराखंड भी उदाहरण हैं. ऐसे राज्यों के लिए कोई प्रावधान क्यों नहीं है, क्योंकि ऐसा करने से वहां वोट नहीं मिलेंगे. कश्मीर में 35ए हटने से बीजेपी को वोट मिलेगा.'

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