क्या नजीब के जाने के बाद भी जारी रहेगी 'जंग'

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुलाकात के बाद निजी कारणों को एलजी के इस्तीफ़े की वजह बताया लेकिन कहा कि वह भी इस फैसले से हैरान हैं. नए एलजी पद के लिए जिन नामों की चर्चा हो रही है उनसे भी केजरीवाल के मतभेद पनपने की आशंका जताई जा रही है.

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केजरीवाल और नजीब जंग केजरीवाल और नजीब जंग

अमित कुमार दुबे / कपिल शर्मा

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  • 23 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 10:09 PM IST

एलजी नजीब जंग के इस्तीफे की असल वजहों का खुलासा अभी नहीं हुआ है, लेकिन नए एलजी के नामों को लेकर सरगर्मी ज़रूर शरु हो गई है. इस बीच नजीब जंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकत की है. इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी उपराज्यपाल से मिलने पहुंचे थे, हालांकि पिछले कई दिनों से दोनों का टकराव लगातार मीडिया की सुर्खियां बना रहा.

नजीब जंग के इस्तीफे पर अरविंद केजरीवाल ने भी हैरानी जताई और सुबह नाश्ते पर उनसे मुलाकात करने पहुंचे. लंबे वक्त तक चली दोनों की मुलाकात के बाद तल्खी और कड़वाहट गायब ज़रुर लगी. दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग पर दो साल आरोपों के तीर चलाने के बाद केजरीवाल और उनकी पूरी सरकार के सुर बदल गए हैं. 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुलाकात के बाद निजी कारणों को एलजी के इस्तीफ़े की वजह बताया लेकिन कहा कि वह भी इस फैसले से हैरान हैं. नए एलजी पद के लिए जिन नामों की चर्चा हो रही है उनसे भी केजरीवाल के मतभेद पनपने की आशंका जताई जा रही है. पूर्व पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी और किरण बेदी ऐसे ही नाम हैं.

सूत्रों के मानें तो रेस में पूर्व गृह सचिव अनिल बैजल का नाम सबसे आगे है. इसकी पुख्ता वजह है कि बैजल ने केंद्र सरकार में गृहसचिव रहते केंद्र शासित प्रदेश के नाते दिल्ली को करीब देखा और समझा है.  

नजीब जंग के इस्तीफे बाद उनकी जगह कोई भी आए लेकिन सवाल है कि क्या वह दिल्ली की चुनी हुई सरकार के साथ ताल-मेल बिठा पाएगा. क्योंकि विपक्षी पार्टियां अभी से इस बात को लेकर आशंका जता रही हैं. वजहें साफ हैं बीते कई दिनों से केजरीवाल सरकार और नजीब जंग बहुत सारे मुद्दों पर आमने-सामने रहे हैं. 

दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख कौन होगा इस सवाल पर भी सबकी नजरें टिकी हैं. अधिकारों की अदालती जंग में 4 अगस्त 2016 को हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए एलजी को दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख बताया था. एलजी ने हाई कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली सरकार की 400 फाइलों की समीक्षा के लिए शुंगलू कमेटी का भी गठन किया, जिसकी जांच में केजरीवाल सरकार की कई गड़बडियों की बात सामने आ रही है.

इसके अलावा केजरीवाल पर तबादले और नियुक्तियों के मामले में भी उपराज्यपाल पर आरोप लगाते रहे हैं. दिल्ली की एसीबी पर अधिकार को लेकर भी सरकार और राजभवन आमने-सामने रहा है. मई 2016 में दिल्ली के कार्यकारी मुख्य सचिव को लेकर केजरीवाल और एलजी के बीच विवाद काफी गर्मा गया था. शकुंतला गैमलिन की नियुक्ति के मामले में केजरीवाल ने बीजेपी पर उपराज्यपाल के जरीए 'तख्तापलट' करने का आरोप तक लगा दिया था. दिल्ली महिला आयोग को लेकर विवाद तो अभी भी ताज़ा है. पहले स्वाति मालीवाल की नियुक्ति की फाइल एलजी ने सरकार को लौटा दी और अब महिला आयोग में सदस्य सचिव की नियुक्ति को लेकर विवाद गर्माया हुआ है. 

ज़ाहिर है दिल्ली सरकार और राजभवन के बीच की तल्खी कम होने की उम्मीद कम ही नज़र आ रही है. ऐसे में कहा जा सकता है कि राजनिवास से नजीब जंग जा ज़रूर रहे हैं, लेकिन विवाद और टकराव के मुद्दे अब भी राजभवन की फाइलों में हैं.

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