पीयूष गोयल की रियलिस्टिक कीमतों पर फ्लैट्स बेचने की अपील, बिल्डर्स एसोसिएशन्स ने जताई असमर्थता

उद्योग को पहले से ही मंदी का सामना करना पड़ रहा था, फिर कोरोनो वायरस महामारी के बाद लॉकडाउन लगाए जाने से और हालत खस्ता हो गई.

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सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई) सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)

अभि‍षेक आनंद

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2020,
  • अपडेटेड 8:52 PM IST

  • बिल्डर्स से रियलिस्टिक कीमतों पर फ्लैट्स बेचने की अपील
  • बिल्डर्स एसोसिएशन्स ने कीमतें कम करने में जताई असमर्थता

रेलवे के साथ वाणिज्य मंत्रालय को भी संभालने वाले पीयूष गोयल ने दो दिन पहले बिल्डर्स से रियलिस्टिक यानि वाजिब कीमतों पर फ्लैट्स बेचने की अपील की थी. इस पर बिल्डर्स एसोसिएशन्स ने कीमतें कम करने में असमर्थता जताई है.

उद्योग को पहले से ही मंदी का सामना करना पड़ रहा था, फिर कोरोनो वायरस महामारी के बाद लॉकडाउन लगाए जाने से और हालत खस्ता हो गई. निर्माण कार्य जो पूरी तरह से बंद था, मजदूरों के उलटे पलायन की वजह से फिर रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है.

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वाणिज्य मंत्री ने मौजूदा संकट पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिल्डर्स और प्रमोटर्स के साथ चर्चा की. बैठक के दौरान गोयल ने उद्योग के फाइनेंस फ्लो को बनाए रखने के लिए बिल्डरों को "वास्तविक कीमतों" पर मौजूदा फ्लैट्स को बेचने का सुझाव दिया.

हालांकि, बिल्डरों ने फ्लैट्स की कीमतें कम करने में असमर्थता जताई. अजनारा इंडिया लिमिटेड के सीएमडी अशोक गुप्ता के दावे के मुताबिक कीमतें पहले से ही कम हैं और रीयल एस्टेट सेक्टर और डेवलपर्स के पास ‘रेडी टू मूव’ की बड़ी इंवेंट्री नहीं है जो समग्र मांग को पूरा कर सके.

सरकार से समर्थन की आवश्यकता

गुप्ता ने कहा, "फोकस हाथ में जो प्रोजेक्ट्स हैं उन्हें पूरा करने पर होना चाहिए. कीमतों पर नियंत्रण के साथ इसे अंजाम देने के लिए, डेवलपर्स को सरकार से समर्थन की आवश्यकता है. मौजूदा सरकार सेक्टर की मदद के लिए कई उपायों के साथ आगे आई है, लेकिन जरूरत सभी मुद्दों को एक साथ संबोधित करने की है. उन्होंने कहा कि संकट (कोरोना वायरस) अब जब पूरे देश में फैल गया है, खास तौर पर तत्काल एक्शन की जरूरत है ताकि 'सभी के लिए आवास' सपने को पूरा किया जा सके.”

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हीरानंदानी ग्रुप के एमडी निरंजन हीरानंदानी के मुताबिक मंत्री ने इस तथ्य के संदर्भ में (फ्लैट्स की कीमत घटाने) कहा कि कई डेवलपर्स ने बैंकों से लोन लिया है, जिसका वो वापस भुगतान करने में असमर्थ हैं.

हीरानंदानी ने कहा, "मुझे लगता है कि यह अच्छी सलाह है और अगर कोई लेवरेज से ऊपर है तो वास्तव में कीमतों में कटौती करनी चाहिए और फिर बैंक को पैसे वापस देने चाहिए. हमारे लिए कीमत कम करना संभव नहीं है. अगर हम रेडी रेकनर कीमत 10 प्रतिशत घटाते हैं तो हमें आयकर पेनल्टी के तौर पर 35% पेनल्टी देनी पड़ेगी. हमने मंत्री को ये बदलाव करने का सुझाव दिया. अगर ऐसा नहीं होता तो हम कीमतें नहीं घटा सकते.

उद्योग में गिरावट

हालांकि होमबॉयर्स एसोसिएशन ने गोयल के सुझाव का स्वागत किया है. उन्होंने साथ ही होम लोन की ब्याज दरों को कम करने की मांग की. न्यू एरा फ्लैट ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन (नेफोवा) के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने कहा, "अगर कीमतों में कमी की जाती है और होम लोन की दरें और नीचे लाई जाती हैं, तो सिर्फ असली खरीदार ही दिलचस्पी दिखाएंगे. फ्लैटों का कब्जा सौंपने में अत्यधिक विलंब और अन्य मुद्दों की वजह से खरीदारों का बिल्डर्स पर भरोसा कम हुआ है, यही कारण है कि उद्योग में गिरावट आ रही है.’’

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