गुजरात में अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन, कांग्रेस ने साधा निशाना

दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ये कोई साधारण विरोध नहीं, बल्कि किसानों से जुड़ा जन आंदोलन है. सिंघवी ने कहा कि एक प्रकार से ये एक नई क्रांति है, एक आंदोलन है, एक जबरदस्त बगावत है.

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पीएम मोदी-अमित शाह पीएम मोदी-अमित शाह

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 12:37 PM IST

सूरत में पाटीदार समुदाय के एक सम्मान समारोह में पहुंचे अमित शाह को हार्दिक समर्थकों का जमकर विरोध का सामना करना पड़ा. मौका भांपते ही इस घटना के जरिए कांग्रेस ने पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को जमकर घेरा. कांग्रेस ने इसे पीएम और बीजेपी की गिरती लोकप्रियता से जोड़ते हुए राज्य और केंद्र में सरकार की ठप नीतियों का हवाला दिया.

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दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ये कोई साधारण विरोध नहीं, बल्कि किसानों से जुड़ा जन आंदोलन है. सिंघवी ने कहा कि एक प्रकार से ये एक नई क्रांति है, एक आंदोलन है, एक जबरदस्त बगावत है. में इनके कारणों को जरा ध्यान से देखें, जो बहुत गंभीर है. उसका विश्लेषण करना आवश्यक है.

'गुजरात में खेती की हालात बहुत बुरी'
सिंघवी ने एक-एक करके गुजरात की खेती से जुड़ी नाकामियों का ब्यौरा दिया. उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में जहां-जहां बीजेपी की सरकार रही है, वहां खेती की हालत बहुत बुरी है. जो पटेल हैं, किसान हैं, हैं, जो आश्रित हैं बहुत बड़े पैमाने पर कृषि के ऊपर, वो सब ढकेले जा रहे हैं. शहरों में और शहरों में रोजगार नहीं मिल रहा है. ये बिना रोजगार विकास की जो बात है वो विशेष रूप से गुजरात मॉडल को आप कह सकते हैं जितनी प्रशंसा की गई है उसकी वो मॉडल है- बिना रोजगार के विकास का. इसका आक्रोश आप देख रहे हैं विभिन्न तौर-तरीकों से.

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मोदी काल में 5 हजार से ज्यादा किसानों की मौत
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मोदी जी ने ये एक मिथ्या प्रचार किया, जगह-जगह चुनावों में, गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कि गुजरात में किसानों की आत्महत्या नहीं होती. लेकिन ये आपको नहीं बताया कि आंकड़े कुछ और ही कहानी सुनाते हैं. लगभग 11 वर्ष का जो समयकाल है 2002 से 2012 का, उसमें साढ़े 5 हजार से ज्यादा किसानों की मौत हुई है. ये सरकारी आंकड़े हैं, इनको छुपाने का प्रयत्न किया गया.

बीजेपी शासन में गिरी ग्रोथ रेट: कांग्रेस
सिंघवी ने कहा कि आज लगभग साढ़े 3 लाख किसानों की संख्या कम हुई है गुजरात में. अगर आप कृषि के रूप में आंकड़े देखें तो बड़ी दयनीय है. 2003 से 2008 तक कई कृषि पदार्थ हैं जो शून्य नहीं बल्कि माइनस में चले गए. अगर आप ग्रामीण इन्फलेशन देखें, क्योंकि ये सभी इस आक्रोश के कारण हैं. सबसे ज्यादा भारत में ग्रामीण इन्फलेशन गुजरात में है. यूपीए सरकार के दौरान 2013-2014 तक ग्रोथ रेट 4 प्रतिशत थी. मगर एनडीए सरकार में खेती का ग्रोथ 2014-2015 में राष्ट्रीय स्तर पर 0.2 प्रतिशत, माईनस हो गई. 2015-2016 में 1 प्रतिशत हुई है. ये हाल है केंद्र सरकार का.

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