वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020-21 पेश कर दिया है. उन्होंने अब तक का सबसे लंबा भाषण दिया. लेकिन इस बजट के बाद शेयर मार्केट में भारी गिरावट देखी गई. इस बजट पर व्यवसायियों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है. जबकि कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि जो बजट पेश किया है, उससे इकोनॉमी पटरी पर बिल्कुल नहीं आएगी.
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि हम इकोनॉमी पर राजनीति नहीं करना चाहते. उन्होंने कहा, ''सांप्रदायिक वैमनस्यता और आर्थिक सुधार एक साथ नहीं हो सकता. बजट में जो प्रावधान किए गए हैं उससे मांग नहीं बढ़ेगी. टैक्स स्लैब में सुधार की बात कही जा रही है, लेकिन सुधार की जगह इसे और मुश्किल कर दिया गया है. पहले 5 स्लैब था और अब 7 स्लैब हो गया. यह कैसा सुधार है. शेयर मार्केट की गिरावट से साफ दिख रहा है कि मार्केट बजट से खुश नहीं है. उन्होंने कहा कि मांग अब तक के सबसे निचले स्तर पर है. सबसे लंबा बजट पेश किया गया, लेकिन इकोनॉमी को पटरी पर लाने के लिए इसमें कुछ नहीं किया गया. मांग बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया गया."
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फील गुड वाला बजट है- जयंत सिन्हा
भाजपा नेता जयंत सिन्हा ने कहा कि यह बजट फील गुड वाला है. उन्होंने कहा, ''इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव एक अच्छा कदम है. इसमें कर दाताओं बड़ी राहत दी गई है. टैक्स सिस्टम में सुधार बड़ा कदम है. इस बजट में किसान, युवा, मिडिल क्लास, महिला सभी के लिए कुछ न कुछ दिया गया है. टैक्स में छूट से बाजार में मांग बढ़ेगी. जो लोग कह रहे हैं कि टैक्स में राहत नहीं दी गई है, उन्हें पता होना चाहिए कि इस सुधार से 40 हजार करोड़ का सरकार को घाटा होगा. बाजार के एक दिन के गिरावट को आप बजट पर प्रतिक्रिया नहीं मान सकते. मार्केट में कुछ दिनों में सुधार हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इस बजट में स्टार्टअप के लिए बहुत कुछ किया गया है. LIC को लेकर उठाया गया कदम सराहनीय है."
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इकोनॉमिक सेंटीमेंट में सुधार के प्रयास- विक्रम
सीआईआई के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर ने कहा कि सरकार ने कारपोरेट टैक्स में काफी सुधार किया है. इस सुधार के बाद इनवेस्टर अब बैंकाक, थाइलैंड में इनवेस्ट करने की जगह इंडिया में इनवेस्ट करना पसंद कर रहे हैं. बजट में सभी पहलुओं को छुआ गया है. बजट में इकोनॉमिक सेंटीमेंट में सुधार की कोशिश की गई है. टैक्स स्लैब में सुधार की कोशिश की गई है जो सराहनीय है. सीआईआई के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि इकोनॉमी को सुस्ती से निकालने के लिए बजट में काफी प्रयास किया गया है. ग्रामीण इकोनॉमी पर जोर दिया गया है. इससे मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी, खपत बढ़ेगा. हालांकि उन्होंने मार्केट की गिरावट पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.
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क्या कहा राहुल गांधी ने?
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि बजट के नाम पर सिर्फ भाषण था. कोई सेंट्रल थीम नहीं है. अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए में बजट में कुछ नहीं था. बजट के नाम पर सिर्फ भाषण और आंकड़ों का जुमला पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्दा बेरोजगारी है. मैंने इस बजट में ऐसा कोई रणनीतिक विचार नहीं देखा, जिससे युवाओं को रोजगार मिले. राहुल गांधी ने कहा कि इतने लंबे बजट में सिर्फ आंकड़ों का जुमला था. बार-बार चीजें दोहराई जा रही थीं. उन्होंने कहा कि सरकार को पता है कि क्या हो रहा है? अर्थव्यवस्ता कहां जा रही है?
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