आज का दिन: बीजेपी के दिग्गज नेता ही क्यों नहीं लड़ना चाहते गुजरात में चुनाव?

गुजरात में चुनाव क्यों नहीं लड़े रहे BJP के दिग्गज नेता?, CAA के बिना DMs को नागरिकता देने की शक्ति गृ्ह मंत्रालय किस क़ानून के तहत दे रहा है? T20 वर्ल्डकप के सेमीफ़ाइनल में इंग्लैंड के सामने कितनी मज़बूत नज़र आएगी टीम इंडिया? सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.

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Vijay Rupani Nitin patel Vijay Rupani Nitin patel

अमन गुप्ता

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  • 10 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 8:38 AM IST

आज तक रेडियो आप के लिए लाता है सुबह सवेरे देश का पहला मॉर्निंग न्यूज़ पॉडकास्ट ‘आज का दिन’, जहां आप हर सुबह अपने काम की शुरुआत करते हुए सुन सकते हैं आपके काम की ख़बरें और उन पर क्विक एनालिसिस. साथ ही, सुबह के अख़बारों की सुर्ख़ियाँ और आज की तारीख में जो घटा, उसका हिसाब किताब. आगे लिंक भी देंगे लेकिन पहले जान लीजिए कि आज के एपिसोड में हमारे पॉडकास्टर अमन गुप्ता किन ख़बरों पर बात कर रहे हैं. 

गुजरात में चुनाव क्यों नहीं लड़ रहे बीजेपी के दिग्गज नेता? 
गुजरात में बीजेपी 32 साल से सत्ता में है और उसे बरकरार रखने की कोशिश में भी है. कल शाम दो ख़त गुजरात से दिल्ली भेजे गए . ये ख़त वहाँ की राजनीति के लिए सरप्राइजिंग हैं. पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और उनकी सरकार में मंत्री रहे नितिन पटेल के ये खत हैं. और इस खत में उन्होंने कहा है कि वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते. रुपाणी राजकोट वेस्ट से अभी विधायक हैं और मेहसाना सीट से विधायक हैं नितिन पटेल. इन दोनों के अलावा विजय रुपाणी सरकार में मंत्री रहे छह और विधायकों ने चुनाव लड़ने से इनकार किया है. और ये खबर ऐसे वक्त में आई है जब दिल्ली में बीजेपी की फाइनल कैंडीडेट लिस्ट पर बीजेपी मंथन में जुटी हुई है. मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल दिल्ली में ही हैं. खबर आते ही कारणों पर कयास लगने लगे. इन्टरेस्टिंग ये भी है कि विजय रुपाणी और नितिन पटेल दोनों अभी 75 साल के नहीं, ऐसे में वो फॉर्मूला भी लागू नहीं होता। जो बीजेपी ने टिकट वितरण के लिए मानक बनाया हुआ है. फिर क्या वजहें हैं इन पत्रों के और गुजरात बीजेपी के इन बड़े नेताओं की चुनाव न लड़ने की इस इच्छा की? 

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DMs को क्यों मिल रहा नागरिकता देने का अधिकार? 
नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर हुए प्रोटेस्ट कौन नहीं भूला होगा! एक साथ देश के कई हिस्से इसके गवाह रहे. हालांकि अभी इस पर बहस शांत है क्योंकि सरकार भी इसे लागू करने की जल्दी में नहीं. इसी बीच एक ख़बर आई है कि गृह मंत्रालय ने 29 जिलों के डीएम को जो देश के अलग अलग राज्यों से हैं उन्हें अधिकार दिया है कि दूसरे मुल्कों से आए ग़ैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता प्रमाण पत्र दे सकते हैं. इसका खुलासा हुआ है गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई एनुअल रिपोर्ट में. इसके बाद ही सवाल उठने शुरू हो गए कि जब सीएए अभी लागू ही नहीं हुआ तो फिर ये फैसला किस कानून के तहत है. और इसकी जरूरत क्यों थी? 

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