राज्यसभा: सबरीमाला में महिलाओं का विरोध, आचार्य बोले- हमें शर्म आनी चाहिए

प्रसन्न आचार्य केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि कोई बताएगा हमें सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश को लेकर क्या हो रहा है. जिस तरह से मंदिर में महिलाओं के घुसने का विरोध हो रहा है.

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बीजेडी सांसद प्रसन्न आचार्य बीजेडी सांसद प्रसन्न आचार्य

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 09 जनवरी 2019,
  • अपडेटेड 7:53 PM IST

बीजू जनता दल (बीजेडी) के सांसद प्रसन्न आचार्य ने सबरीमाला मंदिर का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि जिस तरह से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश से रोका जा रहा है. उससे देखकर लगता है कि हम किस देश में रह रहे हैं, जहां परंपरा के नाम में महिलाओं की आजादी छिनी जा रही है.

प्रसन्न आचार्य केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि कोई बताएगा हमें सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश को लेकर क्या हो रहा है. जिस तरह से मंदिर में महिलाओं के घुसने का विरोध हो रहा है, उससे साफ है कि मोदी सरकार केवल दिखावे के लिए 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा दे रही है.

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एक तरफ केंद्र सरकार तीन तलाक को लेकर सक्रिय दिखती है. ठीक उसका उल्टा सबरीमाला मामले से मुंह फेर रही है. इससे साफ होता है कि महिलाओं की आजादी ये सरकार भी नहीं चाहती है. उन्होंने कहा, 'एक तरह कहते हो कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और दूसरी तरह सबरीमाला मंदिर में मां, बेटी, बहन को जाने से रोको.'

बीजेडी सांसद ने कांग्रेस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सबरीमाला मामले पर केंद्र सरकार के साथ-साथ कांग्रेस का रवैया भी शक पैदा करता है. क्योंकि हम सभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इज्जत करते हैं, लेकिन सबरीमाला में जो कुछ हो रहा है उसका जिम्मेदार कौन है? जिस तरह से वहां महिलाओं का विरोध हो रहा है उससे साफ है कि सरकार की नीयत साफ नहीं है.

प्रसन्न आचार्य ने कहा, 'हमें शर्म आनी चाहिए कि महिलाएं मंदिर जाती हैं तो हम उसका शुद्धिकरण करने लगते हैं, हमें आत्म समीक्षा करना चाहिए कि हम किस दिशा में जा रहे हैं.' वहीं सवर्ण आरक्षण पर समर्थन का ऐलान करते हुए बीजेडी सांसद ने कहा कि इसपर सरकार की नीति तो सही है, लेकिन नीयत पर सवाल उठता है क्योंकि चुनाव से ठीक पहले सरकार बिल को लेकर आई है.

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दरअसल, केरल में 2 जनवरी से बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क गई थी, क्योंकि दो महिलाओं ने सबरीमला मंदिर में प्रवेश किया था. केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन हिंसा के लिए बीजेपी और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया था.

मालूम हो कि केरल के सबरीमाला मंदिर 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर बैन था, जिसे 28 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया था. लेकिन इसके बावजूद भी मंदिर ने बैन बरकरार रखा था, जिसके बाद 2 जनवरी को बिंदु और कनकदुर्गा नाम की दो महिलाओं ने मंदिर में पहली बार प्रवेश किया.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि हर उम्र वर्ग की महिलाएं अब मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी. क्योंकि हमारी संस्कृति में महिला का स्थान आदरणीय है. यहां महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है और मंदिर में प्रवेश से रोका जा रहा है. यह स्वीकार्य नहीं है.

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