वोटों की संख्या में अंतर का दावा, सुप्रीम कोर्ट में ADR की याचिका

लोकसभा चुनाव में वोटों की संख्या में अंतर का दावा करते हुए एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि इस गड़बड़ी के बारे में कुछ भी बताने से चुनाव आयोग ने इनकार कर दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट पहुंच एडीआर (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट पहुंच एडीआर (फाइल फोटो)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 25 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 11:17 AM IST

  • एडीआर ने चुनाव में वोटों की संख्या में अंतर का किया दावा
  • नतीजों की घोषणा से पहले सटीक डेटा मुहैया कराने की मांग

लोकसभा चुनाव में वोटों की संख्या में अंतर का दावा करते हुए एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि इस गड़बड़ी के बारे में कुछ भी बताने से चुनाव आयोग ने इनकार कर दिया है. ऐसे में अदालत से मांग गई है कि वह भारतीय निर्वाचन आयोग को यह निर्देश दे कि किसी चुनाव नतीजे को घोषित करने से पहले वो सटीक डेटा मुहैया कराए कि कितने वोट पड़े.

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इसके साथ ही एडीआर ने 2019 के लोकसभा चुनाव परिणामों से संबंधित आंकड़ों में ऐसी सभी विसंगतियों की जांच करने की भी अपील की है. चुनाव प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए एडीआर ने कहा है कि चुनाव नतीजों को घोषित करने वाले मौजूदा सिस्टम से भ्रम की स्थित पैदा हो रही है.

एडीआर का दावा

अपनी याचिका में एडीआर ने कहा है कि चुनाव आयोग द्वारा प्रमाणित चुनावी डेटा जारी होने से पहले ही चुनाव नतीजों की घोषणा करके चुनाव कराने की मौजूदा प्रणाली में होने वाली घुसपैठ कहीं अधिक गंभीर और एक खतरनाक प्रवृत्ति है. इसलिए इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है.

याचिका में कहा गया है, 'इस तरह की चीजों से संदेह, भ्रम और कन्फ्लिक्ट की स्थित पैदा होती है. इससे चुनावी प्रक्रिया के बदनाम होने की आशंका भी बढ़ जाती है. चुनाव आयोग को नतीजे जारी करने से पहले सभी रिटर्निंग अफसरों से सटीक आंकड़ों को हासिल करने के बाद ही ऐलान करना चाहिए. लेकिन अगर इससे पहले ऐलान किया जाना असंवैधानिक, गैरकानूनी, मनमाना और अन्यायपूर्ण है.'

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बदला गया था डेटा

बता दें कि चुनाव आयोग ने 2019 के लोकसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद अपनी वेबसाइट के साथ-साथ अपने मोबाइल ऐप,‘My Voters Turnout App’ में भी मतदान का डेटा को बदल दिया था.

याचिका में कहा गया है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद आयोग की वेबसाइट और उसके ऐप पर जो वोटिंग डाटा उपलब्ध कराए गए थे उनमें कई बार बदलाव किए  गए थे और हो सकता है कि यह बदलाव कमियों को छिपाने के लिए किया गया हो.

एडीआर के रिसर्च का आधार

यह रिसर्च उसी डेटा के आधार पर किया गया है जो डेटा आयोग की तरफ से 28 मई 2019 और 30 जून 2019 को वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया था. एडीआर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कुल 347 सीटों पर पड़ें कुल वोट और ईवीएम में पड़े वोटों की कुल संख्या में अंतर है. 6 सीट तो ऐसे हैं जहां वोटों की संख्या प्रत्याशी के जीते गए वोटों की संख्या से भी ज्यादा है.

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