बिजली कंपनियों को 90 हजार करोड़ की राहत, उपभोक्ताओं को कैसे मिलेगा फायदा?

बिजली वितरण कंपनियों का कई राज्यों पर बकाया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिजली वितरण कंपनियों के ऊपर फरवरी 2020 तक बिजली उत्पादन कंपनियों का 92,602 करोड़ रुपये बकाया है. जो लॉकडाउन अवधि में बढ़कर करीब 94 हजार करोड़ हो गया है.

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विशेष पैकेज से बिजली कंपनियों को मिलेगी राहत (फाइल फोटो) विशेष पैकेज से बिजली कंपनियों को मिलेगी राहत (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2020,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST

  • कंपनियों पर बकाया करीब 94 हजार करोड़ का
  • 90 हजार करोड़ रुपये का मिला विशेष पैकेज

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को बिजली वितरण कंपनियों के लिए बड़ी राहत देते हुए उन्हें 90 हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज देने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पावर फाइनेंस कॉरपोर्रेशन (पीएफसी) और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) के जरिये यह राशि उपलब्ध कराई जाएगी. कोरोना महामारी की वजह से डिस्कॉम को नकदी की किल्लत हो रही थी. इस लिए 90 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

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वित्त मंत्री ने कहा कि डिस्कॉम को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. वित्त मंत्री ने कहा कि पीएफसी और आरईसी डिस्कॉम को यह पैसा देंगी. इससे डिस्कॉम कंपनियों को मदद मिलेगी. उम्मीद है कि सरकार के इस फैसले का लाभ ग्राहकों को भी मिलेगा.

डिस्कॉम कंपनियों को 90,000 हजार करोड़ रुपये की यह रकम दो किस्तों में मिलेगी. बता दें, बिजली वितरण कंपनियों का कई राज्यों पर बकाया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिजली वितरण कंपनियों के ऊपर फरवरी 2020 तक बिजली उत्पादन कंपनियों का 92,602 करोड़ रुपये बकाया है. जो लॉकडाउन अवधि में बढ़कर करीब 94 हजार करोड़ हो गया है.

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इसी समस्या के निदान के लिये 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के तहत जारी पैकेज में उन्हें 90,000 करोड़ रुपये तक की नकदी उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है. पैकेज में यह भी कहा गया है कि केन्द्रीय सार्वजनिक उपक्रम और विद्युत उत्पादन कंपनियां बिजली वितरण कंपनियों को कुछ छूट भी देंगी लेकिन यह छूट इस शर्त पर दी जायेगी कि इसका लाभ कंपनियां अपने अंतिम ग्राहकों को उनके फिक्स्ड शुल्क में राहत के तौर पर उपलब्ध कराएंगी.

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ऐसे में स्पष्ट है कि केंद्र सरकार ने अपने अंतिम ग्राहकों तक लाभ पहुंचाने की कोशिश की है.

हालांकि एक सवाल यह भी उठता है कि अब भी बिजली वितरण कंपनियों के ऊपर चार हजार करोड़ का बकाया है. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह भी है कि 90 हजार करोड़ के भारी बकाये के बाद उनके लिए आगे की राह बेहद आसान हो जाएगी.

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बिजली चोरी पर रोक सरकार की पहली प्राथमिकता

गौरतलब है कि सरकार ने बिजली कंपनियों को देश भर में स्मार्ट मीटर लगाने का आदेश दिया है. कई राज्यों में तेजी से इस पर काम हो रहा है. बिजली चोरी रोकने के लिए 1 अप्रैल से हरेक घर में प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य हो चुका है. केंद्र सरकार ने 2022 का लक्ष्य रखा है, जिसके बाद लोगों को बिना मीटर को रिचार्ज कराए घर में बिजली की सप्लाई नहीं मिलेगी.

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