राजस्थान: चुनाव कहीं से भी लड़े, मगर यहां नेता को दिखता है भविष्य!

राजस्थान के भीलवाड़ा में एक ऐसा शहर है, जिसे ज्योतिष नगरी कहा जाता है. यहां चुनावों के समय छोटे से लेकर बड़े नेता तक अपना भविष्य पूछने आ जाते हैं.

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कारोई में स्मृति ईरानी कारोई में स्मृति ईरानी

मोहित पारीक

  • भीलवाड़ा,
  • 05 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 3:05 PM IST

राजस्थान विधानसभा चुनाव में बस एक महीना बाकी है. नेताजी टिकट पाने के लिए आलाकमान और चुनाव जीतने के लिए जनता को खुश करने में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. टिकट पाने के लिए जयपुर से दिल्ली तक के चक्कर लगा रहे हैं और जनता को खुश करने के लिए छोटी-छोटी गलियों में भ्रमण कर रहे हैं. इन सब के साथ ही नेता प्रदेश के भीलवाड़ा जिले के कारोई गांव के भी चक्कर लगा रहे हैं.

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दरअसल, यह एक ऐसा शहर है, जिसे ज्योतिष नगरी कहा जाता है. जिस तरह मथुरा में पेड़े वाले नजर आते हैं, वैसे ही कारोई में हर तरह ज्योतिष केंद्र बना हुआ है. हर ज्योतिषि खुद को पुराना और मशहूर होने का दावा करता है और चुनाव करीब आने के साथ यहां नेताओं ने डेरा डालना शुरू कर दिया है. चुनाव के मौसम में टिकट से लेकर जीत तक के लिए नेता ज्योतिष नगरी के चक्कर लगा रहे हैं.

यहां पहले भी बड़े-बड़े नेता आ चुके हैं और अब भविष्य जानने के लिए चुनाव के मौसम में स्थानीय नेता भी खूब आ रहे हैं. यहां पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से लेकर राजस्थान के अन्य क्षेत्रों के विधायक अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं. फिलहाल यहां के ज्योतिषियों के पास विधानसभा चुनाव में टिकट की आस लगाए बैठे स्थानीय नेताओं की कतार लग रही है.

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खास बात ये है कि चुनाव के मौसम में सिर्फ राजस्थान के नहीं दूसरे राज्यों से भी नेता भी अपना भविष्य जानने की जिज्ञासा के साथ पहुंचते हैं. चुनावी मौसम में यहां खास भीड़ रहती है और नेता अपना भविष्य यहां जानने को उत्सुक रहते हैं. यहां कई परिवार ज्योतिष का ही काम कर रहे हैं और हर सप्ताह हजारों लोग यहां अपना भविष्य दिखवाने आते हैं.

विधानसभा का समीकरण

राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं. इनमें 142 सीट सामान्य, 33 सीट अनुसूचित जाति और 25 सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं. 2013 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसने 163 सीटों पर जीत दर्ज की थी. जबकि कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई थी. बहुजन समाज पार्टी को 3, नेशनल पीपुल्स पार्टी को 4, नेशनल यूनियनिस्ट जमींदारा पार्टी को 2 सीटें मिली थीं. जबकि 7 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे.

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