अजमेल ब्लास्ट: दोषी के पिता रोते हुए बोले- बेकसूर है बेटा

देवेंद्र गुप्ता के बुजुर्ग पिता सत्य प्रकाश गुप्ता फैसला आते ही बुरी तरह रोने लगे. 'आज तक' से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका बेटा निर्दोष है.

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देवेंद्र गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा देवेंद्र गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा

शरत कुमार

  • जयपुर,
  • 22 मार्च 2017,
  • अपडेटेड 3:36 PM IST

अजमेर ब्लास्ट केस के दोषी देवेंद्र गुप्ता और भवेश पटेल को जयपुर की एनआईए कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत के फैसले से दोषियों के परिजन काफी दुखी है. देवेंद्र गुप्ता के बुजुर्ग पिता सत्य प्रकाश गुप्ता फैसला आते ही बुरी तरह रोने लगे. 'आज तक' से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका बेटा निर्दोष है. देवेंद्र के पिता का कहना है कि उनके बेटे का धमाकों से कोई लेना-देना नहीं है.

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घटना को याद करते हुए देवेंद्र के पिता ने कहा कि मेरी पत्नी को कैंसर हुआ था तब सिर्फ एक बार देवेंद्र बीमार मां से मिलने आया था. देवेंद्र झारखंड में रहता था. उन्होंने कहा कि अजमेर ब्लास्ट के बाद वो इतने बदनाम हो गए कि सब कुछ छोड़कर इंदौर चले गए. देवेंद्र गुप्ता कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का सदस्य बन गया था. उसने 1999 में इंदौर में संघ के संगठन सेवा भारती में अपना कार्य शुरु किया. 2001 में उसका संपर्क संघ के प्रचारक सुनील जोशी से हुआ जिसने उसे इंदौर में ही तहसील प्रचारक बना दिया. इसके बाद संघ के जिला प्रचारक के रूप में देवेंद्र को झारखंड के जामताड़ा इलाके की जिम्मेदारी मिली थी.

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देवेंद्र के पिता सत्य प्रकाश गुप्ता ने बताया कि सुनाल जोशी ने जब अन्य संगठनों के साथ 2004 के उज्जैन के सिंहस्थ में अजमेर ब्लास्ट की योजना बनाई तो बम के टाइमर डिवाइस के लिए फर्जी सिम कार्ड लाने की जिम्मेदारी देवेंद्र को दी थी. देवेंद्र गुप्ता ने वहां सोनू गोयल नाम के शख्स के कागजात लिए और फिर जमताड़ा, आसनसोल में तीन सिम कार्ड खरीदे. फर्जी सिम के अलावा उन्हीं कागजात से दो फर्जी ड्राइविंग लाईसेंस भी बनवाए. उस वक्त देवेंद्र गुप्ता मिहिजाम स्थित आरएसएस के दफ्तर में रहता था जिसे भूपत महेश्वरी सदन कहा जाता है.

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धमाके के दूसरे दोषी भवेश पटेल के परिजन भी कुछ इसी तरह की कहानी बयान करते हैं. 39 साल का भवेश पटेल गुजरात के हाथीखाना बाजार भरुच का रहने वाला है. वो संघ के सदस्य के रूप में सुनील जोशी के संपर्क में आया था. सभी उसे सुनील जोशी के सेवक के तौर पर जानते थे. भवेश सुनील जोशी के पास से सेंट्रो कार में बम लेकर देवास से चला था और फिर झबुआ होते हुए गोधरा आया. जहां रातभर रुकने के बाद वो बस से उदयपुर होते हुए पुष्कर आया और शाम को दरगाह में बम रखा. कोर्ट में पेशी के लिए भवेश के भाई ने कहा कि उनका भाई तो साधु था जो सुनील जोशी की सेवा करता था. उसने कोर्ट में बताया कि भवेश ने कोई बम नहीं रखा और उसे तो साजिश की जानकारी भी नहीं होगी. भेवेश पटेल ने 'आज तक' से बातचीत में कहा कि वो निर्दोष है और उसे फंसाया गया है.

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