भाखड़ा नहर ने लौटाया 26 साल पुराना 'गम': शादी से लौटते वक्त गायब हुआ था परिवार, अब मिला वैन का मलबा, कंकाल और बच्चे की शर्ट देख फफक पड़े परिजन

पंजाब के रूपनगर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जो किसी फिल्मी कहानी या किसी पुराने रहस्य के सुलझने जैसी है. 26 साल पहले भाखड़ा नहर की लहरों में समाया एक परिवार और उनकी वैन आखिरकार बाहर निकाल ली गई है.

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एक शव ढूंढने उतरे गोताखोर को मिली 26 साल पहले गायब हुई मारुति वैन.(Photo: AI-generated) एक शव ढूंढने उतरे गोताखोर को मिली 26 साल पहले गायब हुई मारुति वैन.(Photo: AI-generated)

aajtak.in

  • रूपनगर ,
  • 21 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:54 PM IST

पंजाब के रूपनगर जिले में भाखड़ा नहर के पानी ने 26 साल पुराने एक गहरे जख्म को हरा कर दिया है. अक्टूबर 2000 में एक शादी समारोह से लौटते समय लापता हुई मारुति ओमनी वैन को स्थानीय गोताखोरों की मदद से बाहर निकाल लिया गया है. 32 फुट गहरे पानी में दफन यह गाड़ी अपने साथ उस परिवार की आखिरी निशानियां भी लेकर बाहर आई है, जो दो दशक पहले अचानक गायब हो गया था.

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दरअसल, बीते दिनों गोताखोर कमलप्रीत सैनी नक्कियां गांव के पास एक अन्य शव की तलाश में नहर में उतरे थे. इसी दौरान उनकी नजर पानी के नीचे दबे लोहे के एक ढांचे पर पड़ी.

लंबे समय तक पानी में रहने के कारण वैन की छत और पिछला हिस्सा पूरी तरह गल चुका था. सिर्फ आगे का कुछ हिस्सा ही सुरक्षित बचा था.

वैन के अगले हिस्से की तलाशी लेने पर सैनी को कुछ इंसानी कंकाल और एक बच्चे की छोटी सी शर्ट मिली. माना जा रहा है कि यह उस 8 साल के बच्चे की है जो इस हादसे का शिकार हुआ था.

अक्टूबर 2000 की वो मनहूस रात 
घटना कोटला गांव के एक परिवार से जुड़ी है. साल 2000 में तीन पुरुष और एक 8 साल का बच्चा शादी से लौट रहे थे, तभी उनकी वैन बेकाबू होकर भाखड़ा नहर में जा गिरी.

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सर्च ऑपरेशन फेल हुआ 

उस समय पेशेवर गोताखोरों ने महीनों तक नहर की खाक छानी थी, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि न तो गाड़ी मिली और न ही शव.

परिजनों का अनुरोध

अब गोताखोर सैनी ने जब कोटला गांव के पीड़ित परिवार से संपर्क किया, तो उन्होंने नम आंखों से गाड़ी बाहर निकालने का अनुरोध किया. ट्रैक्टरों और स्थानीय लोगों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद मलबे को बाहर खींचा गया.

अंतिम विदाई: प्रार्थना सभा के साथ दी गई शांति
दशकों के इंतजार के बाद जब अपनों की निशानियां और अस्थियां मिलीं, तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई.

गोताखोर कमलप्रीत सैनी ने बताया, "नहर की तलहटी में बहाव बहुत तेज था, वैन को बाहर निकालना नामुमकिन-सा काम था, लेकिन परिवार की भावनाओं के लिए हमने यह जोखिम उठाया."

मंगलवार को कीरतपुर साहिब में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई. 26 साल बाद परिवार को यह संतोष मिला कि अब उनके प्रियजनों का अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन धार्मिक रीति-रिवाजों से हो सकेगा.

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