केसरिया पगड़ी, पंजाबी में भाषण और साल में 35 दौरे... पंजाब में नायब सैनी इतना एक्ट‍िव क्यों हैं? 

पंजाब में नए नेताओं को पार्टी में शामिल कराने से लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर हमले तक, नायब सैनी लगातार सुर्खियों में हैं. बीजेपी के लिए वो एक ऐसे ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के तौर पर देखे जा रहे हैं, जो हरियाणा की सीमाएं पार कर पंजाब में पार्टी की जमीन मजबूत कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, सैनी बीते एक साल में 35 से ज्यादा बार पंजाब का दौरा कर चुके हैं.

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पंजाब में हरियाणा सीएम नायब सैनी का बढ़ता कद, 2027 से पहले बीजेपी का बड़ा दांव? पंजाब में हरियाणा सीएम नायब सैनी का बढ़ता कद, 2027 से पहले बीजेपी का बड़ा दांव?

कमलजीत संधू

  • चंडीगढ़,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:00 PM IST

2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव पर नजरें टिकाए बीजेपी ने पड़ोसी राज्य में अपनी सियासी गतिविधियां तेज कर दी हैं. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इन दिनों पंजाब में पार्टी का सबसे सक्रिय चेहरा बनकर उभरे हैं. बीते कुछ महीनों में सैनी की पंजाब यात्राएं लगातार बढ़ी हैं और उनके दौरों को 2027 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है.

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हरियाणा में 2024 में हैट्रिक जीत के बाद बीजेपी के ‘पोस्टर बॉय’ बने नायब सैनी पिछले करीब एक महीने से पंजाब के लगातार दौरे कर रहे हैं. इन दौरों में वो न सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, बल्कि गांवों-कस्बों में जाकर आम लोगों से भी संवाद कर रहे हैं. सैनी कई मौकों पर केसरिया पगड़ी पहनकर नजर आए हैं और मंच से पंजाबी और देसी हरियाणवी का मिश्रण बोलते दिखे हैं.

बीजेपी का कहना है कि ये सब राजनीति नहीं, बल्कि संगठनात्मक काम का हिस्सा है. खुद सैनी भी खुद को 'साधारण कार्यकर्ता' बताते हैं. उनका कहना है, 'मैं एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता हूं और उसी हैसियत से पंजाब में काम कर रहा हूं.'

हालांकि, सैनी के दौरे पूरी तरह योजनाबद्ध नजर आते हैं. वो गांवों और शहरों के साथ-साथ धार्मिक स्थलों पर भी पहुंच रहे हैं. अब तक वो स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब), आनंदपुर साहिब, माछीवाड़ा के गुरुद्वारा चरण कंवल साहिब और फतेहगढ़ साहिब जैसे प्रमुख गुरुद्वारों में मत्था टेक चुके हैं.

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पंजाब में नए नेताओं को पार्टी में शामिल कराने से लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर हमले तक, नायब सैनी लगातार सुर्खियों में हैं. बीजेपी के लिए वो एक ऐसे ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के तौर पर देखे जा रहे हैं, जो हरियाणा की सीमाएं पार कर पंजाब में पार्टी की जमीन मजबूत कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, सैनी बीते एक साल में 35 से ज्यादा बार पंजाब का दौरा कर चुके हैं.

ओबीसी समुदाय से आने वाले नायब सैनी को लेकर ये भी चर्चा है कि उनकी मां कुलवंत कौर सिख हैं और परिवार में एक पुरुष सदस्य के सिख धर्म अपनाने की परंपरा रही है. बीजेपी इस सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी पंजाब में अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है. मग्घी मेले जैसे बड़े धार्मिक-राजनीतिक आयोजनों में उनकी मौजूदगी को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

हरियाणा सीएम के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली का कहना है कि नायब सैनी को पंजाब में आम लोगों से स्वतः आमंत्रण मिलते हैं. 'लोग उन्हें मिलने बुलाते हैं, किसान उनसे जुड़ने की बात करते हैं. हालांकि, वह हरियाणा के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए पंजाब में सीधे वादे नहीं कर सकते. फिर भी लोगों को उनसे उम्मीदें हैं,' जेटली का ये भी दावा है कि पार्टी मुख्यालय की ओर से कोई औपचारिक निर्देश नहीं हैं और ये दौरे आमंत्रण के आधार पर हो रहे हैं.

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31 जुलाई 2025 को संगरूर के सुनाम में शहीद उधम सिंह की 86वीं शहादत दिवस पर सैनी की मौजूदगी के बाद उनके पंजाब दौरे और तेज हो गए. बीते एक महीने में वो हफ्ते में एक-दो बार पंजाब पहुंच रहे हैं. 14 जनवरी 2026 को श्री मुक्तसर साहिब में मग्घी मेले के दौरान आयोजित राजनीतिक सम्मेलन में भी सैनी की अहम भूमिका रही. वहां उन्होंने पंजाब को हरियाणा का 'वड्डा प्रा' (बड़ा भाई) बताते हुए कहा कि दोनों राज्यों का रिश्ता खून का है. उन्होंने ‘हरियाणा मॉडल’ को पंजाब की समस्याओं का समाधान बताते हुए आम आदमी पार्टी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए.

रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने भी सैनी के दौरों का समर्थन करते हुए कहा कि 'पंजाब को आज हीलिंग की जरूरत है. हरियाणा छोटा भाई है और छोटे भाई बड़े भाई से नाराज नहीं होते.' हालांकि, आम आदमी पार्टी इन गतिविधियों से बेपरवाह होने का दावा कर रही है.

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, ' वो क्या पहनते हैं या कौन सी भाषा बोलते हैं, इस पर मैं टिप्पणी नहीं करूंगा. सभी पार्टियां प्रचार करती हैं, लेकिन बीजेपी हमारे लिए कोई चुनौती नहीं है. सैनी को अपने राज्य की चिंता करनी चाहिए. हरियाणा में पेपर लीक का सबसे बड़ा मामला हुआ है, पंजाब में ऐसा कुछ नहीं हुआ.'

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विपक्षी दलों ने भी सैनी की बढ़ती मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस विधायक प्रगट सिंह का कहना है कि इससे बीजेपी की पंजाब इकाई की कमजोरी उजागर होती है. 'पंजाब बाहरी दखल स्वीकार नहीं करता. सैनी को आगे कर ओबीसी वोटों को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है, लेकिन यह पंजाब की राजनीति की संस्कृति नहीं है'. 

शिरोमणि अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत चीमा ने तुलनात्मक रूप से नरम रुख अपनाते हुए कहा कि सैनी पार्टी को मजबूत करने के लिए आ रहे हैं, ये उनका अधिकार है और इससे अकाली दल पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

दिलचस्प बात ये है कि सैनी और भगवंत मान के बीच शुरुआती सौहार्द भी ज्यादा दिन नहीं चला. सितंबर 2025 में जब भगवंत मान बीमार थे, तब सैनी उनसे मोहाली के एक अस्पताल में मिलने पहुंचे थे. लेकिन बाद में दोनों के बीच सियासी तल्खी बढ़ती गई. सैनी के पंजाब दौरों के बाद भगवंत मान भी हरियाणा पहुंचे और रोहतक में एक बास्केटबॉल हादसे में मारे गए छात्र के परिवार से मिलकर हरियाणा सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए.

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, दोनों राज्यों के बीच सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है. शासन, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य योजनाएं, पराली, एसवाईएल, एमएसपी और किसानों जैसे मुद्दों पर यह अंतरराज्यीय राजनीतिक मुकाबला लंबे समय तक चलता दिख रहा है.

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