'समाज का कर्ज अभी बाकी है...', 88 साल की उम्र में झाड़ू को बनाया हथियार, पूर्व DIG को मिला पद्मश्री सम्मान

चंडीगढ़ के सेक्टर-49 स्थित IAS/IPS सोसायटी में रहने वाले सिद्धू रोज सुबह 7 बजे घर से निकलते हैं और 7 से 8 घंटे तक अपने आसपास की सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई करते हैं. उन्होंने बताया कि सुबह की सैर के दौरान सड़कों पर फैला कचरा उन्हें भीतर तक विचलित करता था.

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पूर्व डीआईजी सिद्धू को भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया है. (Photo- ITG) पूर्व डीआईजी सिद्धू को भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया है. (Photo- ITG)

अमन भारद्वाज

  • मोहाली,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:57 PM IST

जिस उम्र में ज़्यादातर लोग आराम और विश्राम को जीवन की प्राथमिकता बना लेते हैं, उसी उम्र में 88 वर्षीय सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को नया अर्थ दे दिया है. चंडीगढ़ की सड़कों और गलियों को पिछले एक दशक से साफ कर रहे पूर्व डीआईजी सिद्धू को उनके निःस्वार्थ सेवा कार्य के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया है.

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चंडीगढ़ के सेक्टर-49 स्थित IAS/IPS सोसायटी में रहने वाले सिद्धू रोज सुबह 7 बजे घर से निकलते हैं और 7 से 8 घंटे तक अपने आसपास की सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई करते हैं. सोशल मीडिया पर पिछले साल वायरल हुए वीडियो में जब उन्हें कूड़ा उठाते देखा गया, तो देशभर से सराहना मिली. लेकिन सिद्धू हमेशा की तरह चर्चा और कैमरे से दूर रहे. वे मोबाइल फोन तक नहीं रखते और मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं.

आजतक से बातचीत में सिद्धू ने कहा, “मैंने पुलिस सेवा ₹250 की तनख्वाह से शुरू की थी. आज 1.5 लाख रुपये की पेंशन मिलती है, लेकिन मुझे लगता है कि समाज का कर्ज अभी बाकी है. सफाई मेरा पेबैक है.”

उन्होंने बताया कि सुबह की सैर के दौरान सड़कों पर फैला कचरा उन्हें भीतर तक विचलित करता था. वे कहते हैं, “अब मैं टहलने नहीं जाता, पूरा दिन पर्यावरण साफ करने में लगाता हूं.” सिद्धू का मानना है कि चंडीगढ़ देश के सबसे सुंदर शहरों में से एक है, लेकिन पढ़े-लिखे लोगों द्वारा सड़क पर कचरा फेंकना उन्हें पीड़ा देता है. उन्होंने कहा, “महंगी गाड़ियों से लोग कूड़ा फेंकते हैं, यह अस्वीकार्य है. प्रशासन अपना काम कर रहा है, लेकिन स्वच्छता जनभागीदारी से ही आएगी.”

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गुरू नानक की शिक्षा और शेक्सपियर का प्रभाव

1963 में इंस्पेक्टर के रूप में भर्ती हुए सिद्धू 1981 में आईपीएस (IPS) बने. उन्होंने पंजाब में आतंकवाद के चरम दौर के दौरान अमृतसर में सिटी एसपी के रूप में अपनी सेवाएं दीं. वे कॉलेज स्तर के बॉक्सर रहे हैं, साहित्य के शौकीन हैं और शेक्सपियर से लेकर पंजाबी साहित्य तक पढ़ते हैं. गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं से प्रेरित सिद्धू पर्यावरण संरक्षण को आध्यात्मिक कर्तव्य मानते हैं.

खास बात यह है कि सिद्धू को पद्मश्री मिलने की जानकारी तक परिवार को नहीं थी. केंद्रीय गृह मंत्रालय से आए फोन के बारे में भी उन्होंने किसी को नहीं बताया. परिवार का कहना है कि सम्मान मिलने के बावजूद वे उसी दिन सफाई करने निकल पड़े. उनके दामाद पुष्पिंदर सिंह कहते हैं, “88 साल की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर हम चिंता करते हैं, लेकिन वे रुकने को तैयार नहीं.”

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