श्रमिकों की घर वापसी से पंजाब से किसान परेशान, इस बार कैसे होगी धान की रोपाई?

कोरोना के चलते श्रमिकों की घर वापसी से एक तरफ उद्यमियों की चिंता बढ़ गई है तो दूसरी तरफ पंजाब के किसानों के लिए भी धान की रोपाई पर संकट गहरा गया है. पंजाब का किसान धान की खेती के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों पर निर्भर है, जिनके जाने से किसान को धान की रोपाई की चिंता सता रही है.

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धान की रोपाई करते मजदूर धान की रोपाई करते मजदूर

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 08 मई 2020,
  • अपडेटेड 3:26 PM IST

  • श्रमिकों की वापसी से पंजाब में खेती का छाया संकट
  • यूपी-बिहार के मजदूरों पर निर्भर हैं पंजाब के किसान

लॉकडाउन की वजह से देश के अलग-अलग राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों की घर वापसी ट्रेन और बसों के जरिए लगातार हो रही है. श्रमिकों की घर वापसी से एक तरफ उद्यमियों की चिंता बढ़ गई है तो दूसरी तरफ पंजाब के किसानों के लिए भी धान की रोपाई पर संकट गहरा गया है. पंजाब का किसान धान की खेती के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों पर निर्भर है, जिनके जाने से किसान परेशान है.

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पंजाब में करीब 10 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूरों ने घर-वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. हालांकि, मई और जून के महीने में बिहार और यूपी से बड़ी तादाद में मजदूर पंजाब में धान की रोपाई के लिए आते थे, लेकिन कोरोना संकट और लॉकडाउन के चलते इस बार मजदूरों के आने का सवाल ही नहीं है बल्कि अब तो यहां जो हैं भी वो अपने घरों को लौट रहे हैं. पंजाब के अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और बठिंडा से हर रोज श्रमिक स्पेशल ट्रेन से मजदूरों की वापसी हो रही है.

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लुधियाना के पाल मांजरा गांव के किसान परमिंदर सिंह के पास करीब 40 एकड़ जमीन है. परमंदिर की खेतों में धान की रोपाई के लिए हर साल पूर्वी उत्तर प्रदेश से 20 से 25 मजदूर काम करने आते हैं, लेकिन इस बार कोरोना संकट के चलते वो नहीं आ पा रहे हैं. ऐसे में अब मजदूरों की घर वापसी से परिंमदर के लिए परेशानी बढ़ गई है. उन्हें धान की खेती की चिंता सता रही है.

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परिमंदर का कहना है कि हम प्रवासी श्रमिकों को लगातार मना रहे हैं कि घर न जाएं, लेकिन वे रुकने को तैयार नहीं हैं. उन्हें गांव में रहने खाने की सारी व्यवस्था दे रहे हैं, इसके बाद भी वो रुकने को राजी नहीं हैं. उनका कहना है कि सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस बार धान की रोपाई की इजाजत 1 जून से दी जाए. अगर जून के शुरुआती सप्ताह में सरकार से अनमुति नहीं मिली तो हम किसान बर्बाद हो जाएंगे. वो कहते हैं कि पंजाब में धान की खेती के लिए यहां के लोकल मजदूर नाकाफी हैं.

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पंजाब के मोहाली के रहने वाले किसान निक्षत्र सिंह भी मजदूरों की वापसी से धान की रोपाई को लेकर चिंतित हैं. निक्षत्र सिंह कहते हैं कि बिहार के हमारे पक्के लेबर हैं जो पिछले 10 साल से हमारे खेतों में धान की रोपाई का काम करते थे, लेकिन इस बार कोरोना की वजह से उनका आना मुश्किल हैं. ऐसे में हम यह कोशिश कर रहे हैं कि पंजाब से जो मजदूर घर जा रहे हैं वो अगर 10 से 15 दिन रुक जाते हैं तो धान की रोपाई रात दिन करके हम पूरी कर लेंगे, लेकिन मजदूर रुक नहीं रहा है.

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पंजाब में 30 लाख हेक्टयर भूमि पर धान की खेती

भारतीय किसान युनियन के महासचिव हरविंदर सिंह लखोवाल ने aajtak.in से बातचीत करते हुए कहा कि पंजाब में 30 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है. पिछले साल 180 लाख मीट्रिक टन धान की पैदावार हुई थी, लेकिन इस बार आधा भी होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है. पंजाब में धान की खेती प्रवासी मजदूरों के बगैर संभव नहीं, इसीलिए हम सरकार से मांग कर रहे हैं कि श्रमिकों को जाने से रोका जाए और किसानों को अग्रिम धान रोपाई की अनुमति दी जाए. पिछले साल लोकसभा चुनाव के चलते पंजाब में धान की खेती के लिए 13 जून से अनुमति दी गई थी, ऐसे में इस बार इसे 1 जून से कर देना चाहिए.

हरविंदर सिंह लखोवाल का कहना है कि मशीन से धान की रोपाई बेहतर तरीके से नहीं हो पाती है. पंजाब में महज पांच लाख हेक्टयर भूमि पर ही मशीन से धान की खेती की जा सकती है. उन्होंने कहा कि लाख मशीन का प्रयोग कर लें लेकिन धान की बिजाई में मानवीय श्रम का विकल्प नहीं बन सकती है. इसके अलावा अभी मशीन से सफल है या नहीं इसके नतीजे आने बाकी हैं.

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पंजाब में धान की खेती पर संकट, मजदूरों की हालत खराब

बता दें कि बिहार और यूपी से आने वाले मजदूरों को पंजाब के किसान एक एकड़ में धान की रोपाई के लिए 2500 से 3000 रुपये देते हैं. इसके अलावा मजदूरों को खाने और रहने की व्यवस्था किसान अपने गांव में ही करता है. पांच से छह मजदूर मिलकर पूरे दिन में 1 से डेढ़ एकड़ में धान की रोपाई का काम कर लेते हैं. इस तरह से एक मजदूर करीब 7 से 8 रुपये की कमाई कर लेते हैं.

पंजाब में धान रोपाई का काम जून से लेकर जुलाई तक चलता है. इस तरह से ढेड़ से दो महीने में एक मजदूर 40 से 50 हजार रुपये की कमाई कर लेते हैं, जो अपने गांव में रहकर मुश्किल है. कोरोना के चलते किसान और मजदूरों दोनों पर संकट छाया हुआ है. किसान को धान की रोपाई की परेशानी है तो मजदूरों के सामने रोजगार की मुसीबत खड़ी हो गई है.

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