पंजाब में सत्ता परिवर्तन के साथ बदलती नजर आ रही हैं योजनाएं

पंजाब में सत्ता परिवर्तन के साथ ही कांग्रेस की नवनियुक्त कैप्टन सरकार उन तमाम योजनाओं की जांच करने में लगी है जिन्हें पूर्व की अकाली-बीजेपी सरकार ने शुरु किया था और इन योजनाओं में सबसे खास है आटा-दाल स्कीम के तहत जारी किए गए नीले कार्ड की स्कीम.

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कैप्टन अमरिंदर सिंह कैप्टन अमरिंदर सिंह

सतेंदर चौहान

  • चंडीगढ़,
  • 05 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 11:31 PM IST

पंजाब में सत्ता परिवर्तन के साथ ही कांग्रेस की नवनियुक्त कैप्टन सरकार उन तमाम योजनाओं की जांच करने में लगी है जिन्हें पूर्व की अकाली-बीजेपी सरकार ने शुरु किया था और इन योजनाओं में सबसे खास है आटा-दाल स्कीम के तहत जारी किए गए नीले कार्ड की स्कीम. जिसके तहत गरीबों को हर महीने आटा और दाल मुफ्त दिया जाता है. लेकिन फिलहाल कैप्टन सरकार ने तय कर लिया है कि अभी के लिए नये नीले कार्डों को जारी नहीं किया जाएगा. दरअसल, इन नीले कार्डों पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और खाद्य मंत्री आदेश प्रताप कैरों की तस्वीरें लगी है.

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सत्ता परिवर्तन के साथ ही अब इन नीले कार्डों से इन तस्वीरों को हटाने की तैयारी की जा रही है. साथ ही कैप्टन अमरिंदर सिंह का मानना है कि आटा दाल स्कीम के तहत कई ऐसे लोगों को भी नीले कार्ड जारी कर दिए गए जिन्हें मुफ्त अनाज की जरूरत नहीं है और वो लोग पहले से ही आर्थिक रुप से संपन्न हैं.

कैप्टन अमरिंदर सिंह का मानना है कि अकाली दल ने अपने चाहने वालों को इस तरह के कार्ड बनाकर लाभान्वित करने की कोशिश की है. इसी के तहत CM कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में अब तक जारी किए गए इन करीब तीन लाख नीले कार्ड की जांच करवाने और इन्हें रिव्यू करवाने की तैयारी कर ली है.

कार्डों पर से नेताओं की तस्वीर हटनी चाहिए: सुखपाल खैहरा, चीफ व्हिप, आम आदमी पार्टी
मुख्य विपक्षी पार्टी आम आदमी पार्टी का भी मानना है कि आटा-दाल स्कीम है तो बहुत बढ़िया, लेकिन अकाली दल ने सिर्फ अपने खास लोगों के नीले कार्ड जारी किए हैं. अकाली दल ने अपने समर्थक ऐसे लोगों को भी नीले कार्ड बांट दिए जिनके बच्चे विदेशों में रहते हैं और जो आर्थिक रुप से काफी संपन्न हैं. आम आदमी पार्टी के नेता सुखपाल खैहरा का कहना है कि आटा-दाल गरीबों को मिलना चाहिए लेकिन जो नीले कार्ड अकाली दल के शासन में जारी किए गए हैं उनका रिव्यू करना चाहिए और इन कार्डों पर से नेताओं की तस्वीर भी हटनी चाहिए.

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आटा-दाल स्कीम के तहत जारी किए गए नीले कार्डो के रिव्यू करवाने और इन कार्डों पर से पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और अन्य अकाली नेताओं की तस्वीर हटाने को लेकर CM कैप्टन अमरिंदर सिंह के फैसले को लेकर अकाली दल ने कटाक्ष किया कि चाहें तो कैप्टन इन कार्डों पर राहुल गांधी या सोनिया गांधी की तस्वीर लगा लें लेकिन गरीबों से उनका हक ना छीनें. आटा-दाल गरीबों की जरूरत है और लगातार इन नीले कार्ड पाने वाले लोगों की डिमांड बढ़ रही है ऐसे में कांग्रेस सरकार को डिमांड के हिसाब से नए कार्ड गरीब जनता को जारी करने चाहिए. और इस स्कीम को बंद नहीं करना चाहिए.

ऐसे परिवार जिन्हें आटा-दाल स्कीम के तहत नीले कार्ड जारी किए गए हैं उनका भी ये मानना है कि पिछले 1 साल से उन्हें राशन के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है. इसकी वजह ये है कि पूर्व सरकार ने अपने चाहने वाले ऐसे लोगों को भी नीले कार्ड जारी कर दिए जो कि गरीबी रेखा से नीचे नहीं हैं बल्कि आर्थिक रुप से काफी संपन्न हैं.

गरीब परिवारों के लोगों का कहना है कि उन्हें एक साल से राशन नहीं मिला है और ऐसे में कैप्टन अमरिंदर सिंह के इन नीले कार्डों की जांच करवाने का फैसला एकदम सही है और सरकार इस स्कीम की ठीक से जांच करवाए और फिर से गरीबों को राशन देना शुरू करें. साथ ही गरीब परिवारों ने मांग की है कि किसी भी तरह से इस आटा-दाल स्कीम को बंद नहीं किया जाना चाहिए.

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सत्ता में आने के साथ ही तमाम महकमों के खातों की जांच करवा रहे हैं और ये पता लगाने में जुटे हैं कि अकाली-बीजेपी सरकार के कार्यकाल में कहां-कहां पर घोटाले हुए हैं. लेकिन इन घोटालों की जांच की मार आटा-दाल स्कीम के तहत हर महीने मुफ्त राशन पाने वाले गरीब परिवारों पर भी पड़ रही है इसीलिए फिलहाल आटा दाल स्कीम के लिए जारी किए गए नीले कार्डों की जांच होने तक पिछले 1 साल से स्कीम के तहत राशन ना मिलने की वजह से हो रही किल्लत से परेशान गरीब परिवारों को राशन मिलना अभी भी मुश्किल ही दिखाई दे रहा है.

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