कोरा कागज... राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संसदीय दल के नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने सोशल साइट एक्स (पहले ट्विटर) पर एक कोरे कागज की तस्वीर शेयर की है. बुधवार को कोरे कागज की तस्वीर शेयर करते हुए डेरेक ने कैप्शन में लिखा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद का विशेष सत्र बुलाया है. ये है एजेंडा. डेरेक का ये सोशल मीडिया पोस्ट ऐसे समय में आया है जब संसद के विशेष सत्र का एजेंडा क्या है? इसे लेकर हंगामा बरपा है.
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है. सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में भी सवाल किया है कि संसद के विशेष सत्र का एजेंडा क्या है? उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि विपक्ष को विशेष सत्र के एजेंडे के संबंध में कोई जानकारी नहीं है.
उन्होंने अपनी चिट्ठी में ये भी लिखा है कि आम तौर पर विशेष सत्र से पहले बातचीत होती है, सहमति बनती है और इसका एजेंडा भी पहले से तय होता है. ऐसा पहली बार हो रहा है जब बिना एजेंडा तय हुए कोई बैठक बुलाई जा रही है. विशेष सत्र में पांच दिन गवर्नमेंट बिजनेस के लिए आवंटित किए जाने को सोनिया ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और नौ मुद्दे भी बताए हैं जिन पर विपक्ष चर्चा चाहता है. इनमें महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की मांगें, एमएसएमई, जातीय जनगणना, केंद्र-राज्य संबंध, चीन सीमा और सामाजिक सद्भाव के साथ ही अडानी मुद्दे पर जेपीसी की मांग शामिल है.
सिर्फ मोदी चालीसा के लिए नहीं बैठेंगे- जयराम
संसद के विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस के संसदीय रणनीतिक समूह की बैठक भी हुई. इस बैठक के बाद जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस इस सत्र में केवल मोदी चालीसा के लिए नहीं बैठेगी. पार्टी इस सत्र में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दे भी उठाएगी. देश के लिए जो मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, उन पर चर्चा के लिए पार्टी दबाव डालेगी. इससे पहले, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार के आवास पर इंडिया गठबंधन की कैम्पेन कमेटी की मीटिंग हुई. इस बैठक में भी संसद के विशेष सत्र का मुद्दा छाया रहा.
संसद के विशेष सत्र को लेकर क्यों बरपा है हंगामा
दरअसल, सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाने का ऐलान किया है. पांच दिन के इस विशेष सत्र का एजेंडा क्या है? इसे लेकर सरकार की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एजेंडे की बात पर ये जरूर कहा था कि हम इसे लेकर भी चर्चा करेंगे. सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से कोई जानकारी आई नहीं और हर रोज इसे लेकर एक नए मुद्दे पर अटकलें लगने लगीं.
शुरुआत में ये कहा गया कि सरकार इस विशेष सत्र में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को लेकर बिल ला सकती है. सरकार ने इसे लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में आठ सदस्यों की कमेटी भी बना दी. 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को लेकर अटकलें थीं ही कि यूसीसी, महिला आरक्षण जैसे मसलों को लेकर बिल आने के आसार जताए जाने लगे. इसी बीच देश का नाम बदले जाने को लेकर प्रस्ताव की अटकलें हैं तो अब इस सत्र के संसद के पुराने भवन में शुरू होने और दूसरे दिन से नए भवन में कार्यवाही चलने की भी बातें सामने आई हैं. संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने का ऐलान हुए एक हफ्ते हो गए हैं लेकिन इसके एजेंडे को लेकर अभी भी सस्पेंस है. सरकार ने ये सत्र क्यों बुलाया है? ये सरकार ही जाने लेकिन इसे लेकर विपक्षी दलों में हलचल बढ़ गई है.
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