2024 के चुनाव में कितना असरदार रहेगा 'INDIA'? एनडीए के सामने कितनी बड़ी चुनौती

2024 के चुनावों से पहले देश की सियासत एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. INDIA गठबंधन का बनना अब NDA के लंबे समय से चले आ रहे प्रभुत्व को चुनौती दे रहा है. यह बदलाव वोट शेयरों और सीटों की संख्या के तौर पर मौजूदा समय में भी साफ देखा जा सकता है.

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2024 के चुनावों में कैसी रहेगी स्थिति? 2024 के चुनावों में कैसी रहेगी स्थिति?

दीपू राय

  • नई दिल्ली,
  • 08 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 10:18 PM IST

जैसे-जैसे 2024 का लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, भारत की राजनीतिक बिसात फिर से बिछाई जा रही है. उभरता हुआ INDIA गठबंधन चुनावी मुकाबले का वादा करते हुए अनुभवी NDA के खिलाफ कदम बढ़ा रहा है. 2019 के चुनाव के बाद से अब तक यानी कि पिछले चार वर्षों में, गठबंधन बदल गए हैं, सत्ता की गतिशीलता बदल गई है और यहां तक ​​कि यूपीए का परिचित नाम भी अब बदलकर INDIA कर दिया गया है. तो ऐसे में सवाल है कि 2024 में चुनावी परिदृश्य कैसा होगा?

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एनडीए का वोट शेयर 2019 के 45 प्रतिशत से घटकर 2024 में लगभग 43 प्रतिशत हो सकता है. जबकि पार्टियों के पाला बदलने से INDIA का वोट शेयर 27 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 37 प्रतिशत हो सकता है.

पार्टियों के नंबर पर बात की जाए तो एनडीए का गठबंधन आकार में लगभग दोगुना हो सकता है, जो अधिक क्षेत्रीय दलों के साथ रणनीतिक गठबंधन का संकेत देता है. 

गठबंधनों में बदलाव से ही दिख रहा फर्क

2024 के चुनावों से पहले देश की सियासत एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. INDIA गठबंधन का बनना अब NDA के लंबे समय से चले आ रहे प्रभुत्व को चुनौती दे रहा है. यह बदलाव वोट शेयरों और सीटों की संख्या के तौर पर मौजूदा समय में भी साफ देखा जा सकता है.

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भारत में 2019 के सियासी हालात और 2023 के हालात में काफी फर्क दिख रहा है. दोनों प्रमुख गठबंधनों, एनडीए और यूपीए, में सीटों की संख्या, वोट शेयर और गठबंधन के ढांचे में बदलाव देखा गया है. 2019 में, यूपीए ने 27 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 91 सीटें हासिल कीं. अब इसे INDIA के नाम से जाना जाता है, फिलहाल इस गठबंधन के पास 144 सांसद और लगभग 38 प्रतिशत वोट शेयर हैं.

जबकि एनडीए के पास 45 प्रतिशत वोट शेयर पर 352 सीटें थीं. जिसमें कि अब बदलाव देखा गया है. ऐसा माना जा रहा है कि जनता दल (यूनाइटेड) और शिवसेना जैसे नेताओं के जाने और अजित पवार के एनसीपी गुट के शामिल होने से इसकी संख्या लगभग 43 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 335 सीटों तक गिर गई है.

नंबरों में देखा जा सकता है बदलाव

गठबंधनों में कम-ज्यादा होती पार्टियों के आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 2019 की संख्या के मुकाबले 2023 में बदलाव साफ देखने को मिल सकते हैं. 

सीट शेयर:

एनडीए: 2019 में 352 सीटें जीतने वाले दल घटकर 2023 में 335 के आसपास रह गए हैं.

यूपीए/INDIA: 2019 में 91 सीटें जीतने वाला गठबंधन अब 2023 में 144 सीटों वाला हो गया है.

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वोट शेयर:

एनडीए: 2019 में 45 प्रतिशत से घटकर 2023 में 43 प्रतिशत पर आ गया है. 

यूपीए/INDIA: 2019 में 27 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में लगभग 37 प्रतिशत हो गया है. 

गठबंधन में पार्टियां:

एनडीए: 2019 में NDA में 19 पार्टियां थीं जो कि अब 2023 में बढ़कर 38 हो गई हैं. 

INDIA: गठबंधन की ताकत 2019 में 18 पार्टियों से बढ़कर 2023 में 26 हो गई है. 

NDA में बढ़ीं पार्टियां

चुनावों से पहले संसद की स्थिति तो बदली है लेकिन फिर भी एनडीए ने 2023 में अपना बहुमत बरकरार रखा है. लेकिन घटती सीट और वोट शेयर आगामी चुनावों में गिरावट का संकेत दे रहे हैं. ऐसे में एनडीए में पार्टियों की बढ़ी संख्या रणनीतिक पुनर्गठन का संकेत दे रही है. हाल ही में एनडीए की बैठक में 38 पार्टियां शामिल हुईं, जिनमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिव सेना (शिंदे गुट) और लोक जनशक्ति पार्टी जैसी महत्वपूर्ण पार्टियां शामिल थीं. NDA में जुड़े नए दलों के जरिए भारतीय जनता पार्टी क्षेत्रीय दृष्टिकोण को साधने की कोशिश में है. 

चुनावों से पहले कुछ अनुमानों में एनडीए की 335 के मुकाबले INDIA गठबंधन को 171 लोकसभा सीटें मिलती दिखाई गई हैं, जो प्रमुख राज्यों में संभावित भाजपा को झटका देती दिख रही हैं. 'INDIA' का अनुमानित वोट शेयर एनडीए के 43 प्रतिशत के मुकाबले लगभग 37 प्रतिशत है, वहीं अन्य को 20 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है.

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