शशि थरूर का सरकार से सवाल- क्या घर से नहीं चल सकती संसद, IT में देश इतना कमजोर

शीतकालीन सत्र न बुलाने पर विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार पर निशाना साधने के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी पर सवाल उठाए हैं.

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर (फाइल फोटो) कांग्रेस सांसद शशि थरूर (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:54 PM IST
  • संसद का शीतकालीन सत्र न बुलाने पर विपक्ष हमलावर
  • कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्वीट कर किए सवाल
  • हरसिमरत कौर बादल ने भी केंद्र सरकार को घेरा है

संसद का शीतकालीन सत्र न बुलाने पर विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार पर निशाना साधने के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी पर सवाल उठाए हैं. शशि थरूर ने ट्वीट कर सवाल खड़ा किया कि क्या घर से संसद का सत्र चलाना संभव नहीं है. क्या हम सूचना प्रौद्योगिकी में इतने कमजोर हैं कि 543 सांसदों को नहीं जोड़ सकते. 

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कांग्रेस सांसद ने सरकार से सवाल पूछा कि मुझे एक कारण बता दें, क्यों घर से संसद चलाना संभव नहीं है. क्या हम सूचना प्रौद्योगिकी में इतने कमजोर हैं कि 543 सांसदों को नहीं जोड़ सकते. शशि थरूर ने आगे कहा कि बाकी सब चीजें खुली हैं तो देश की सबसे महत्वपूर्ण विधायी इकाई कैसे बंद रहने को मजबूर है.

वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री और शिरामणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट किया है. उन्होंने कहा कि यह चौंकाने वाला है कि एनडीए सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र को न बुलाने का फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को लेकर सरकार को विरोध का सामना करना पड़ रहा है और ऐसे में सरकार को अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भागना चाहिए. 

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हरसिमरत कौर बादल ने आगे कहा कि जल्द से जल्द संसद का सत्र बुलाया जाना चाहिए. सत्र आयोजित करने के लिए निश्चित रूप से सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं. पूर्व मंत्री ने कहा कि आंदोलन में 20 किसान पहले ही अपनी जान गंवा चुके हैं. कितने किसान और शहीद होंगे, तब सरकार उनकी आवाज सुनेगी. 

वहीं, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद का शीतकालीन सत्र न बुलाने का निर्णय अलोकतांत्रिक है. हमारे देश का कृषि क्षेत्र महासंकट का सामना कर रहा है, इन विषम परिस्थितियों में यह आवश्यक है कि हमारे अन्नदाता की आवाज व कृषि कानून पर विपक्षी दलों का पक्ष सुनकर केंद्र सरकार किसानों के साथ न्याय करें. 

बता दें कि कोरोना संकट का हवाला देते हुए इस बार संसद का शीतकालीन सत्र आयोजित नहीं किया जा रहा है. यह काफी लंबे समय बाद हो रहा है जब संसद का कोई सत्र नहीं हो रहा है. वहीं, कृषि कानूनों को लेकर सरकार पर हमलावर विपक्ष चाहता है कि संसद का सत्र होना चाहिए. 

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