उत्तर प्रदेश और बिहार में हर घर नल से जल योजना के दावे तो बड़े हैं लेकिन जमीन पर हालात बहुत अलग नजर आते हैं. कानपुर के पचौर और शादीपुर गांवों में टंकी और पाइपलाइन की व्यवस्था हो चुकी है, लेकिन स्थानीय लोग लगभग दो साल से पानी की एक भी बूंद पिये बिना हैं. सरकारी तौर पर लाभार्थियों की संख्या दर्ज है, परंतु सच्चाई यही है कि ग्रामीण प्यासे हैं. कई लोगों का आरोप है कि यह योजना भ्रष्टाचार का केन्द्र बन चुकी है, जहां ठेकेदार फंड हड़प चुके हैं.