संगम स्नान से शुरू हुआ विवाद अब शंकराचार्य की पदवी तक जा पहुंचा है. मेला प्रशासन ने नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का सबूत भी मांगा था. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस नोटिस को अपमानजनक और करोड़ों हिन्दुओं की आस्था से खिलवाड़ करने वाला बताया है. एक पेज के नोटिस का जवाब उनके वकील ने आठ पन्नों में दिया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि 18 जनवरी को मेला प्रशासन ने उन्हें गंगा स्नान से रोक दिया और उनके शिष्यों से मारपीट की गई और फिर नोटिस सार्वजनिक कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है.