एसिड अटैक पीड़िता और सामाजिक कार्यकर्ता शाहीन ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी 16 साल लंबी कानूनी लड़ाई के दर्द को साझा किया है. उन्होंने बताया कि निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के बाद उनके लिए न्याय के रास्ते बंद हो गए थे. मुख्य न्यायाधीश ने सहानुभूति दिखाते हुए उन्हें मुफ्त वकील मुहैया कराने और न्याय दिलाने का भरोसा दिया है. शाहीन ने यह भी मांग की है कि एसिड इंजेक्शन मामलों को दिव्यांगता की श्रेणी में रखा जाए, जिससे पीड़ितों को बेहतर मुआवजा एवं सुविधाएं मिल सकें.