विश्वभारती की जमीन पर कब्जे का आरोप, नोबेल विजेता अमर्त्य सेन ने दिया ये जवाब

नोबेल विजेता अर्थशास्त्री ने कहा है कि उनके कब्जे में जो जमीन है, वह रिकॉर्ड में दर्ज है. पूरी जमीन लंबी अवधि के लीज पर है, जिसकी अवधि पूरा होने के आसपास भी नहीं है.

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नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन (फाइल फोटोः पीटीआई) नोबल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन (फाइल फोटोः पीटीआई)

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 27 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:50 AM IST
  • कहा- पिता ने लंबी लीज पर ली थी जमीन
  • अतिरिक्त जमीन कराई थी रजिस्ट्री, है फ्री होल्ड
  • सीएम ममता बनर्जी ने किया सेन का समर्थन

पश्चिम बंगाल के विश्वभारती विश्वविद्यालय यानी शांति निकेतन प्रशासन की ओर से हाल ही में एक सूची जारी की गई थी. इस सूची में विश्वविद्यालय की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों के नाम थे. इस सूची में नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का नाम भी था. अब इसे लेकर अमर्त्य सेन की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है. विश्वविद्यालय की ओर से अवैध कब्जेदारों की सूची में नाम शामिल किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सेन ने आरोप को खारिज किया.

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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक नोबेल विजेता अर्थशास्त्री ने कहा है कि उनके कब्जे में जो जमीन है, वह रिकॉर्ड में दर्ज है. पूरी जमीन लंबी अवधि के लीज पर है, जिसकी अवधि पूरा होने के आसपास भी नहीं है. सेन ने साथ ही यह भी कहा है कि विश्वभारती विश्वविद्यालय ने कभी भी उनके या उनके परिवार पर अवैध रूप से जमीन कब्जा करने का आरोप नहीं लगाया.

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नोबेल विजेता अर्थशास्त्री ने कहा है कि लीज के अतिरिक्त भूमि उनके पिता ने खरीदी थी जो फ्री होल्ड है और दस्तावेजों में मौजा सुरुल के तहत दर्ज हुई थी. विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति विद्युत चक्रवर्ती पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वीसी, विश्वविद्यालय की जमीन से कब्जा हटाने में जुटे हैं. सेन ने तंज करते हुए कहा कि शांतिनिकेतन की संस्कृति और विश्वविद्यालय के वीसी की संस्कृति में अंतर है.

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अमर्त्य सेन ने कहा कि वीसी दिल्ली से नियुक्त हैं और वे पूरे बंगाल को नियंत्रित करना चाह रहे हैं. उन्होंने कहा है कि मौजूदा भारतीय कानूनों के इस्तेमाल को तरजीह देंगे. मानसिक मजबूती के लिए अपने घर की पुरानी तस्वीरों का सहारा लेंगे जो अवनीन्द्रनाथ टैगोर और अन्य कलाकारों ने बनाई हैं. गौरतलब है कि अमर्त्य सेन का जन्म साल 1933 में शांतिनिकेतन में ही हुआ था.

सेन को मिला ममता बनर्जी का साथ

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ मिला है. ममता बनर्जी ने विश्वभारती विश्वविद्यालय की जमीन पर कब्जे के आरोप को गलत बताते हुए कहा कि ये आरोप निराधार हैं. उनके जैसे विश्व प्रसिद्ध व्यक्ति के लिए की जा रही यह साजिश निंदनीय है. 

बंगाल बीजेपी अध्यक्ष ने साधा निशाना

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि नोबल विजेता और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्री को यह देखना चाहिए कि किसी की ओर से राजनीतिक लाभ के लिए उनका इस्तेमाल न हो. वैचारिक आधार पर हमारे मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हम उनका सम्मान करते हैं. उन्होंने सेन से अपील करते हुए कहा कि विकास विरोधी ताकतों की ओर से उनका इस्तेमाल न होने पाए.

 

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